ग्वालियर में पटवारी की सरकारी नौकरी दिलाने का लालच देकर 7 बेरोजगार युवाओं से 50 लाख रुपए ठगने का मामला सामने आया है। युवाओं को जीवाजी यूनिवर्सिटी की लॉ शाखा के एक कर्मचारी ने अरविंद नरवरिया से मिलवाया था।
अरविंद ने भोपाल बुलाकर दो लोगों के नाम बताए और एक को व्यापमं का कर्मचारी, जबकि दूसरे को STF का अधिकारी बताया। इसके बाद आरोपियों ने किसी से 2 लाख तो किसी से 4 लाख रुपए एडवांस लिए। प्रति अभ्यर्थी 12 लाख रुपए में नौकरी दिलाने की डील हुई थी।
आरोपियों ने युवाओं को जबलपुर और भोपाल ले जाकर परीक्षा कराने की बात कही। बाद में फर्जी सिलेक्शन लिस्ट दी और भिंड कलेक्ट्रेट परिसर में एक सेवा केंद्र पर वेरिफिकेशन भी कराया। इसके बावजूद न युवाओं को पटवारी की नौकरी मिली और न ही उनके पैसे वापस हुए। यह मामला उस समय का है, जब मध्यप्रदेश में पटवारी चयन परीक्षा में घोटाले को लेकर हंगामा हुआ था।
यह घटना 16 दिसंबर 2023 से अब तक के बीच की बताई गई है। ठगी के शिकार युवाओं ने जब यूनिवर्सिटी कर्मचारी से रुपए वापस मांगे, तो उसने खुद फरियादी बनकर थाटीपुर थाने में शिकायत की। इस पर सोमवार को FIR दर्ज की गई है।
जीवाजी यूनिवर्सिटी के कर्मचारी से जुड़ी ठगी की कड़ी
जांच में सामने आया कि ठगी के इस जाल की शुरुआत जीवाजी यूनिवर्सिटी के कर्मचारी राजवीर सिंह तोमर निवासी महलगांव की मध्यस्थता से हुई थी। कर्मचारी ने ही बेरोजगार युवाओं रवि शर्मा, शत्रुघ्न शर्मा, पवन कौरव, दिव्यांश शर्मा, जितेंद्र गुर्जर, नागेंद्र चौहान और सतेन्द्र सिंह को मुख्य आरोपी अरविंद नरवरिया से मिलवाया था।
इसके बाद अरविंद सभी को भोपाल ले गया। वहां उसने प्रदीप गौतम का नाम लेते हुए बताया कि वह व्यापमं में कर्मचारी है और नौकरी लगवाने का काम कराएगा। पहले परीक्षा कराने की बात कही गई। तीन दिन रुकने के बाद गोवर्धन सिंह तोमर का नाम सामने आया। उसे STF का बड़ा अधिकारी बताकर युवाओं का भरोसा जीता गया।
12 लाख में डील, भिंड कलेक्ट्रेट में कराया फर्जी वेरिफिकेशन
आरोपियों ने प्रति अभ्यर्थी 12 लाख रुपए में पटवारी की नौकरी लगवाने का ऑफर दिया था। युवाओं को झांसे में लेने के लिए आरोपियों ने सरकारी प्रक्रिया जैसा पूरा सेटअप तैयार किया। उन्हें फर्जी चयन सूची दिखाई गई और जॉइनिंग लेटर भी थमा दिए गए।
वेरिफिकेशन के नाम पर पीड़ितों को कभी भोपाल, कभी जबलपुर तो कभी भिंड कलेक्ट्रेट परिसर के एक सेवा केंद्र पर बुलाया गया। आरोप है कि भिंड कलेक्ट्रेट में युवाओं को एक कर्मचारी से मिलवाकर फर्जी दस्तावेजों का वेरिफिकेशन कराया गया और उनके हस्ताक्षर भी लिए गए। इससे वहां किसी कर्मचारी की भूमिका की आशंका जताई गई है।
ऑनलाइन और कैश के जरिए ऐंठे 50 लाख रुपए
पीड़ितों के मुताबिक, आरोपियों ने धीरे-धीरे फोन-पे और बैंक खातों के जरिए कुल 50 लाख रुपए जमा करवा लिए। एक साल बीतने के बाद भी नौकरी नहीं मिली, तो युवाओं ने अपने पैसे वापस मांगे। आरोप है कि आरोपियों ने रुपए लौटाने से इनकार कर दिया और जान से मारने की धमकियां देने लगे।
इन आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज
ठगी का अहसास होने पर युवाओं ने जीवाजी यूनिवर्सिटी के कर्मचारी राजवीर सिंह तोमर से रुपए वापस मांगे और दबाव बनाया। इसके बाद उसने पूरे डेटा के साथ थाटीपुर थाने में शिकायत की। फरियादी की शिकायत पर पुलिस ने सोमवार को मामला दर्ज किया।
पुलिस ने इस मामले में मुख्य रूप से तीन आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है:
अरविंद नरवरिया: मुख्य आरोपी
गोवर्धन तोमर: खुद को STF अधिकारी बताने का आरोप
प्रदीप गौतम: खुद को व्यापमं का कर्मचारी बताने का आरोप
पुलिस ने क्या कहा?
थाटीपुर थाना प्रभारी विपेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि पीड़ितों की शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपियों ने पटवारी बनवाने का झांसा देकर लाखों रुपए की ठगी की है। पुलिस की टीमें आरोपियों की तलाश में जुटी हैं। जल्द ही सभी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

