मामला-1: BMW कार 760 किमी चलाकर पहुंचाई पहला मामला नेशनल इनर्जी ट्रेडिंग एंड सर्विसेस लिमिटेड का है। कंपनी ने अपनी बीएमडब्ल्यू एम340आई एलसीआई एक्सड्राइव शेडो कार को भोपाल से विशाखापट्टनम भेजने के लिए डीआरएस दिलीप रोड लाइंस की सेवाएं ली थीं। इसके लिए 60 हजार रुपए का भुगतान किया गया और वाहन को कंटेनर के माध्यम से सुरक्षित पहुंचाने का आश्वासन दिया गया। बुकिंग के समय वाहन की मीटर रीडिंग करीब 3864 किलोमीटर थी। जब कार विशाखापट्टनम में डिलीवर हुई तो मीटर रीडिंग 4624 किलोमीटर पाई गई। जांच में सामने आया कि भोपाल से हैदराबाद तक वाहन कंटेनर में लाया गया, लेकिन उसके बाद कंपनी के कर्मचारियों ने बिना ग्राहक की अनुमति के कार को कंटेनर से उतारकर करीब 760 किलोमीटर सड़क मार्ग से चलाकर पहुंचा दिया। फास्टैग कटौती और ओडोमीटर रीडिंग से भी यह तथ्य स्पष्ट हुआ।
मामला-2: मर्सिडीज भी 757 किमी चलाकर पहुंचाई
दूसरा मामला केआरएस डायरेक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड की मर्सिडीज बेंज कार से जुड़ा है। इस कंपनी ने भी अपनी कार को भोपाल से विशाखापट्टनम भेजने के लिए उसी लॉजिस्टिक कंपनी की सेवाएं ली थीं और इसके लिए लगभग 60 हजार रुपए का भुगतान किया था। वाहन को कंटेनर के माध्यम से सुरक्षित पहुंचाने का दावा किया गया था। हालांकि डिलीवरी के समय मीटर रीडिंग देखकर मालिक को संदेह हुआ। जांच में सामने आया कि कार को हैदराबाद के पास कंटेनर से उतारकर करीब 757 किलोमीटर तक सड़क मार्ग से चलाकर विशाखापट्टनम पहुंचाया गया। इस पर वाहन मालिक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और कंपनी को कानूनी नोटिस भी भेजा, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंच गया।
डिलीवरी पर बढ़ी मीटर रीडिंग से खुला मामला
जब दोनों कारें विशाखापट्टनम में डिलीवर की गईं तो मालिकों को मीटर रीडिंग देखकर संदेह हुआ। बीएमडब्ल्यू की रीडिंग 3864 किमी से बढ़कर 4624 किमी हो गई थी, जबकि दूसरे मामले में भी सैकड़ों किलोमीटर की बढ़ोतरी सामने आई। जांच में पता चला कि भोपाल से हैदराबाद तक कारें कंटेनर में लाई गईं, लेकिन इसके बाद ट्रक ड्राइवर्स ने उन्हें कंटेनर से उतारकर करीब 757-760 किलोमीटर सड़क मार्ग से चलाकर विशाखापट्टनम पहुंचा दिया। फास्टैग कटौती और ओडोमीटर रीडिंग से भी यह तथ्य सामने आया। इसके बाद दोनों वाहन मालिकों ने पुलिस में शिकायत और कंपनी को कानूनी नोटिस भेजा।
कंपनी का तर्क: जुलूस के कारण उतारनी पड़ी कार
सुनवाई के दौरान डीआरएस दिलीप रोड लाइंस की ओर से तर्क दिया गया कि हैदराबाद के पास रास्ते में जुलूस निकलने के कारण ट्रैफिक बाधित था और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए कारों को कंटेनर से उतारकर चलाना पड़ा। हालांकि आयोग ने माना कि ग्राहक की अनुमति के बिना ऐसा करना सेवा में कमी है और इसे उचित नहीं ठहराया जा सकता।
दोनों मामलों में 2.20 लाख का भुगतान
जिला उपभोक्ता आयोग भोपाल की पीठ ने दोनों मामलों में कंपनी को आदेश दिया कि दो माह के भीतर 60 हजार रुपए परिवहन शुल्क वापस करे। इसके अलावा 25 हजार रुपए सेवा में कमी के लिए, 20 हजार रुपए मानसिक कष्ट के लिए और 5 हजार रुपए वाद व्यय के रूप में भुगतान करे। निर्धारित अवधि में राशि नहीं देने पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। बता दें कि यह फैसला भोपाल कंज्यूमर आयोग की बैंच 1 के अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ल और सदस्या डॉक्टर प्रतिभा पांडेय ने सुनाया
लग्जरी कारों की सर्विसिंग बेहद महंगी
परिवादियों की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता रोहित शर्मा ने बताया कि दोनों कारें लग्जरी सेगमेंट की हैं और उनकी कीमत करीब एक-एक करोड़ रुपए के आसपास है। ऐसे वाहनों की सर्विसिंग सामान्य गाड़ियों की तुलना में कई गुना महंगी होती है। उन्होंने कहा कि करीब 13 हजार किलोमीटर पर सर्विसिंग होती है और इसकी लागत भी काफी अधिक रहती है। बिना अनुमति इतनी दूरी तक गाड़ी चलाना उपभोक्ता के साथ गंभीर लापरवाही है और जरूरत पड़ने पर मामले में आगे कानूनी विकल्प भी देखे जा सकते हैं।











