दिवाली से पहले ही मध्य प्रदेश के कई शहरों की हवा खराब हो गई है। सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर ग्वालियर है। यहां तीन मॉनिटरिंग स्टेशनों पर AQI 300 के पार दर्ज किया गया।
इसके अलावा भोपाल की हवा भी प्रदूषित हो गई है। राजधानी के पर्यावरण परिसर में AQI 261 दर्ज किया गया, जो खराब (Poor) श्रेणी में आता है। यहां PM 2.5 प्रमुख प्रदूषक है।
ग्वालियर और भोपाल के अलावा इंदौर, उज्जैन और मंडीदीप की हवा भी खराब हो गई है। इंदौर में AQI 233, उज्जैन में 229 और मंडीदीप में 251 दर्ज किया गया।
MP के 5 शहरों का हाल जानिए
भोपाल- प्रदूषित हवा से बढ़ रही परेशानी
राजधानी भोपाल में भी हवा की स्थिति चिंताजनक है। टीटी नगर में AQI 183 और ईदगाह हिल्स में 141 दर्ज किया गया। इन दोनों जगहों पर भी PM 2.5 प्रमुख प्रदूषक है। हालांकि, यहां हवा मॉडरेट (मध्यम) श्रेणी में है। यानी राजधानी के तीनों मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हवा में बारीक कणों का प्रदूषण प्रमुख रूप से दर्ज किया गया है।
ग्वालियर की हवा सबसे ज्यादा खराब, तीनों स्टेशनों पर AQI 300 पार
ग्वालियर में हवा की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। यहां दीनदयाल नगर में AQI 348, महाराज बाड़ा में 334 और सिटी सेंटर में 316 दर्ज किया गया। तीनों जगहों पर हवा वेरी पुअर (बहुत खराब) श्रेणी में है। हालांकि, प्रदेश के किसी भी मॉनिटरिंग स्टेशन पर AQI 400 के पार नहीं पहुंचा है। यानी कहीं भी हवा सीवियर (गंभीर) श्रेणी में नहीं है।
ग्वालियर में बारीक और मोटे, दोनों तरह के धूल कणों का प्रदूषण बढ़ा है। दीनदयाल नगर और सिटी सेंटर में PM 2.5 प्रमुख प्रदूषक है, जबकि महाराज बाड़ा में PM 10 का स्तर ज्यादा है। यानी PM 2.5 के मामले में दीनदयाल नगर और PM 10 के मामले में महाराज बाड़ा सबसे आगे है।
मंडीदीप, इंदौर और उज्जैन में भी हवा खराब
भोपाल के पास स्थित औद्योगिक क्षेत्र मंडीदीप में भी प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है। यहां सेक्टर-D इंडस्ट्रियल एरिया में AQI 251 दर्ज किया गया। यहां PM 10 प्रमुख प्रदूषक है।
इंदौर की छोटी ग्वालटोली में AQI 233 रहा। यहां भी PM 10 का असर ज्यादा है। वहीं, उज्जैन के महाश्वेता नगर में PM 2.5 के साथ AQI 229 दर्ज किया गया।
इसके अलावा सिंगरौली के सूर्यकिरण भवन (NCL) में AQI 206 रहा। यहां PM 10 प्रमुख प्रदूषक है। इन सभी जगहों पर हवा पुअर (खराब) श्रेणी में दर्ज की गई।
इंदौर में प्रदूषण का स्तर सभी इलाकों में एक जैसा नहीं है। छोटी ग्वालटोली में हवा पुअर (खराब) श्रेणी में है। वहीं, मगोड़ा नगर में AQI 188 और रेजिडेंसी एरिया में 172 दर्ज किया गया। इन दोनों जगहों पर हवा मॉडरेट (मध्यम) श्रेणी में है।
एयरपोर्ट एरिया में PM 10 के साथ AQI 101 रहा। इसके उलट रीजनल पार्क में PM 2.5 के साथ AQI सिर्फ 48 दर्ज किया गया, जो गुड (अच्छी) श्रेणी में है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, यह प्रदेश में सबसे कम AQI है।
अब MP के दूसरे शहरों का हाल जानिए
जबलपुर, सागर और दूसरे शहरों में हवा की स्थिति मॉडरेट
जबलपुर के चारों मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हवा मॉडरेट (मध्यम) श्रेणी में दर्ज की गई। यहां मार्हताल में AQI 164, गुप्तेश्वर में 131, सुहागी में 108 और गोविंद भवन कॉलोनी में 74 रहा।
सागर के सिविल लाइंस में AQI 154 और दीनदयाल नगर में 80 दर्ज किया गया। वहीं, कटनी के गोल बाजार में 197, देवास के भोपाल चौराहे पर 162 और पीथमपुर के सेक्टर-2 इंडस्ट्रियल एरिया में 167 AQI रहा। रतलाम के शास्त्री नगर में NO2 प्रमुख प्रदूषक के रूप में दर्ज हुआ। यहां AQI 132 रहा।
वहीं, कम प्रदूषण वाले इलाकों में दमोह की श्रीवास्तव कॉलोनी में AQI 59, मैहर के साहिलारा में 61 और सतना की बांधवगढ़ कॉलोनी में 70 दर्ज किया गया। ये सभी संतोषजनक (Satisfactory) श्रेणी में हैं। सागर के दीनदयाल नगर में भी AQI 80 के साथ हवा इसी श्रेणी में रही।
PM 2.5 और PM 10 के प्रदूषण में ग्वालियर सबसे आगे
प्रमुख प्रदूषकों के आंकड़ों पर नजर डालें तो PM 2.5 का सबसे ज्यादा स्तर ग्वालियर के दीनदयाल नगर में 348 दर्ज किया गया। इसके बाद ग्वालियर के सिटी सेंटर में 316 और भोपाल के पर्यावरण परिसर में 261 रहा।
वहीं, PM 10 के मामले में भी ग्वालियर का महाराज बाड़ा सबसे आगे रहा। यहां AQI 334 दर्ज किया गया। इसके बाद मंडीदीप में 251, इंदौर की छोटी ग्वालटोली में 233 और सिंगरौली में 206 रहा।
गैसीय प्रदूषकों की बात करें तो रतलाम के शास्त्री नगर में NO2 प्रमुख प्रदूषक के रूप में दर्ज हुआ। यहां AQI 132 रहा। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों में गैसीय प्रदूषण की शहरवार तुलना के लिए पर्याप्त जानकारी नहीं है।
PM 2.5 और PM 10 में अंतर समझिए
PM 2.5 हवा में मौजूद बेहद छोटे धूल और प्रदूषण के कण होते हैं। इनका आकार 2.5 माइक्रोमीटर या इससे कम होता है। ये इतने बारीक होते हैं कि सांस के साथ फेफड़ों के अंदर तक पहुंच सकते हैं। कुछ कण खून में भी जा सकते हैं।
वाहनों और फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं, कचरा और पराली जलाना इसके प्रमुख स्रोत हैं। PM 2.5 का स्तर बढ़ने से सांस और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
PM 10 हवा में मौजूद धूल और प्रदूषण के ऐसे कण होते हैं, जिनका आकार 10 माइक्रोमीटर या इससे कम होता है। इनमें सड़क की धूल, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली मिट्टी, सीमेंट और फैक्ट्रियों से निकलने वाले कण शामिल हैं।
ये सांस के जरिए नाक, गले और फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं। PM 2.5 के मुकाबले इनका आकार बड़ा होता है, लेकिन ज्यादा मात्रा में ये भी सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सड़क पर उड़ती धूल, निर्माण कार्य और वाहनों की आवाजाही PM 10 बढ़ने के प्रमुख कारण हैं।

