फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनुस शेख हसीना के 13 अगस्त के बयान का जिक्र कर रहे थे, जिसमें बांग्लादेश के हालिया घटनाक्रम की जांच की माग की थी। यह अब तक हसीना की ओर से आया एकमात्र बयान है। इसे उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय के एक्स हैंडल से शेयर किया गया था। यूनुस के बयान के बाद पूछा जा रहा है कि क्या हसीना को बांग्लादेश प्रत्यर्पित किया जा सकता है।
बांग्लादेश सरकार चाहे तो भारत से उनके प्रत्यर्पण का अनुरोध कर सकता है। दोनों देशों ने 2013 में एक प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए थे। साल 2016 में इस संधि में कुछ बदलाव भी किए गए। संधि में कहा गया है कि दोनों देशों को ऐसे व्यक्तियों को प्रत्यर्पित करना चाहिए 'जिनके खिलाफ कार्यवाही की गई है या जो प्रत्यर्पण योग्य अपराध करने के लिए दोषी पाए गए हैं, या वांछित हैं। संधि उन लोगों के लिए प्रत्यर्पण की अनुमति देती है, जिन पर ऐस आरोप है, जिनमें कम से कम एक साल की जेल की सजा हो सकती है। ये अपराध भारत और बांग्लादेश दोनों में दंडनीय होना चाहिए।
हसीना को प्रत्यर्पित किया जा सकता है?
शेख हसीना के खिलाफ जो आरोप लगे हैं, वो गंभीर हैं। उन पर हत्या के भी मुकदमे हुए हैं। ऐसे में इन आधारों पर उनको प्रत्यर्पित किया जा सकता है लेकिन संधि का ही एक नियम इसमें पेंच भी फंसाता है। संधि में एक प्रावधान है, जो कहता है कि अगर अपराध 'राजनीतिक प्रकृति के हैं तो प्रत्यर्पण से इनकार किया जा सकता है। जाहिर है कि हसीन राजनीतिक शरण का दावा कर सकती हैं। इसके अलावा सरकार का रुख भी इसमें बेहद अहम हो जाता है।
भारत सोच समझकर उठाएगा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत कोई भी कदम उठाने से पहले अपने हितों को ध्यान में रखेगा। संधि की कानूनी बातें मायने नहीं रखतीं। एक्सपर्ट का मानना है कि बांग्लादेश में अभी अंतरिम सरकार है। इसके बयानों से भारत को बहुत परेशानी नहीं होनी चाहिए। यह एक नियमित सरकार है, जिसके साथ भारत लंबे समय तक जुड़ना चाहेगा और इस तरह इस पर ध्यान देगा। साथ ही अभी तक केवल एफआईआर दर्ज की गई हैं। मामले की जांच करनी होगी, आरोपपत्र दाखिल करना होगा और फिर अदालत संज्ञान लेगी। अगर हसीना को दोषी पाया जाता है तो फिर प्रत्यर्पण प्रक्रिया पर बात होगी। बहुत मुमकिन है कि तब तक हालात काफी कुछ बदल चुके हों।











