चीन के साथ रखेंगे संबंध, लेकिन... श्रीलंका के राष्ट्रपति का चुनाव से पहले बड़ा बयान, भारत की सुरक्षा को लेकर क्या कहा?

चीन के साथ रखेंगे संबंध, लेकिन... श्रीलंका के राष्ट्रपति का चुनाव से पहले बड़ा बयान, भारत की सुरक्षा को लेकर क्या कहा?

कोलंबो: श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे का कहना है कि दक्षिण एशिया और हिंद प्रशांत क्षेत्र कठिन समय से गुजर रहा है। चीन को लेकर उन्होंने कहा कि श्रीलंका-चीन के संबंध अच्छे रहे हैं और आगे भी रहेंगे। एक इंटरव्यू में उन्होंने यह बयान दिया। उनका बयान ऐसे समय में आया है जब 21 सितंबर को श्रीलंका में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होना है। राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने पद ऐसे समय में संभाला था, जब श्रीलंका अपने सबसे खराब आर्थिक संकट से जूझ रहा था। उनकी सरकार अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने में कामयाब रही। श्रीलंका में कई महीनों तक भोजन, ईंधन और दवा की कमी देखी गई। विक्रमसिंघे अपने इन्हीं कामों को लेकर फिर से जनादेश की मांग कर रहे हैं।


श्रीलंका ने 2022 में अपने सबसे खराब आर्थिक संकट को देखा था। पूरे देश में प्रदर्शन देखे गए थे। स्थिति ऐसी हो गई थी कि भीड़ राष्ट्रपति के महल में घुस गई। तत्कालीन राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को देश छोड़कर भागना पड़ा। भारत इस दौरान श्रीलंका की मदद को आगे आया। एनडीटीवी के साथ इंटरव्यू में उन्होंने कहा, 'आर्थिक संबंधों को गहरा करना हमारी प्राथमिकता है। खासकर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में। दोनों देशों के हजारों वर्षों से सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध हैं।'


भारत विरोधी बयानों पर क्या बोले


उनके विरोधियों ने भारत विरोधी बयान दिए हैं। इसे लेकर उन्होंने कहा, 'कुछ समूह होंगे जो भारत विरोधी टिप्पणी करेंगे। इसे रोका नहीं जा सकता। लेकिन उद्देश्य इसे कम करना है। जहां तक भारत-श्रीलंका की दोस्ती का सवाल है तो यह दोनों देशों के लोगों पर है और वह पहले ही निर्णय ले चुके हैं।' चीन को लेकर उन्होंने कहा, 'हमारे चीन से अच्छे संबंध हैं और हम इसे जारी रखेंगे।


चीन पर क्या कहा?


इसके आगे उन्होंने जोर देते हुए कहा कि चीन के साथ संबंध में यह भी देखेंगे कि भारत की सुरक्षा प्रभावित न हो। उन्होंने कहा, 'श्रीलंका चीन के साथ कान करता रहेगा। लेकिन हम भारत के हितों को ध्यान में रखते हुए अपनी शर्तों पर काम करेंगे। आखिरकार हम भारत से सिर्फ 32 किमी की दूरी पर हैं' चीन को एक लीडिंग ग्लोबल पावर कहते हुए विक्रमसिंघे ने कहा, 'चीन का हिंद महासागर क्षेत्र में प्रभाव बढ़ने जा रहा है। क्योंकि वह पहले से ही कई देशों के साथ काम कर रहा है।'

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