कांग्रेस की हार के बाद अब क्या होगा अशोक गहलोत का? लोकसभा चुनाव लड़ेंगे या मिलेगी नई जिम्मेदारी
Updated on
18 Dec 2023, 01:18 PM
जयपुर : राजस्थान में बीते दिनों विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अगवाई में कांग्रेस ने चुनाव लड़ा। इसमें कांग्रेस को करारी हार मिली। राजस्थान में इस बार रिवाज बदलने का दावा करते हुए गहलोत ने अपनी योजनाओं के दम पर चुनाव लड़ा। लेकिन जनता ने रिवाज को कायम रखते हुए उन्हें नकार दिया। कांग्रेस को इस चुनाव में 69 सीटें ही मिली। अब कांग्रेस अपनी हार का मंथन कर रही है। उधर, अब सियासी गलियारों में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अगली भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सियासत में चर्चा है कि सरकार को रिपीट करवाने का दावा करने वाले गहलोत का अब क्या भविष्य होगा? इसको लेकर राजनीतिक जानकार कई मायने निकल रहे हैं।गहलोत-पायलट की तकरार कांग्रेस को पड़ी भारी
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच सियासत को लेकर जमकर तकरार रही। सियासी जानकारों का मानना है कि कांग्रेस की हार का एक मुख्य कारण दोनों नेताओं के बीच की लड़ाई भी रही है। जिसके कारण कांग्रेस फिर से रिपीट नहीं हो पाई। लेकिन अब कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष को लेकर एक बार फिर वही तकरार भरें सियासी समीकरण देखने का मिल रहे है। कांग्रेस अब तक अपने नेता प्रतिपक्ष को चुन नहीं पाई है। अब देखने वाली बात यह है कि पायलट को धैर्य रखने की नसीहत देने वाली कांग्रेस अब उनकी क्या भूमिका तय करेगी। क्योंकि इस बार चुनाव गहलोत ने अपने चेहरे पर लड़ा था। इसलिए कांग्रेस ने भी उन्हें फ्री हैंड कर दिया। लेकिन फिर भी गहलोत पार्टी को जीत नहीं दिल पाए।
गहलोत-पायलट की तकरार कांग्रेस को पड़ी भारी
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच सियासत को लेकर जमकर तकरार रही। सियासी जानकारों का मानना है कि कांग्रेस की हार का एक मुख्य कारण दोनों नेताओं के बीच की लड़ाई भी रही है। जिसके कारण कांग्रेस फिर से रिपीट नहीं हो पाई। लेकिन अब कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष को लेकर एक बार फिर वही तकरार भरें सियासी समीकरण देखने का मिल रहे है। कांग्रेस अब तक अपने नेता प्रतिपक्ष को चुन नहीं पाई है। अब देखने वाली बात यह है कि पायलट को धैर्य रखने की नसीहत देने वाली कांग्रेस अब उनकी क्या भूमिका तय करेगी। क्योंकि इस बार चुनाव गहलोत ने अपने चेहरे पर लड़ा था। इसलिए कांग्रेस ने भी उन्हें फ्री हैंड कर दिया। लेकिन फिर भी गहलोत पार्टी को जीत नहीं दिल पाए।
गहलोत को राष्ट्रीय स्तर पर मिल सकती बड़ी जिम्मेदारी!
अपनी योजनाओं के दम पर सरकार रिपीट करवाने का दावा करने वाले गहलोत को इस बार हाई कमान ने फ्री हैंड रखा। लेकिन गहलोत इसमें कामयाब नहीं हो पाए। अब ऐसे में सवाल है कि हाई कमान ने पायलट को धैर्य रखने की बात कही थी, तो क्या अब पायलट को धैर्य रखने का प्रतिफल मिल सकता है? इसको लेकर सियासत में चर्चाएं हो रही है। माना जा रहा है कि गहलोत को कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर की बड़ी जिम्मेदारी देकर राजस्थान की सियासत से दूर कर सकती है। इसके बाद ही कांग्रेस पायलट का कद बढ़ा सकेगी। बता दें कि इससे पहले भी गहलोत कांग्रेस के महासचिव रह चुके हैं। उन्होंने गुजरात राज्य की जिम्मेदारी भी निभाई थी।