आरएलडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शाहिद सिद्दीकी ने कहा कि भविष्य की रणनीति तय करने के लिए जल्द ही पार्टी की एक उच्च स्तरीय बैठक जल्द बुलाई जा सकती है। इसमें इस बात पर चर्चा हो सकती है कि क्या भारत गठबंधन में रहना है या एक अलग रास्ता चुनना है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने में पूरी तरह से विफल रही है। वास्तव में, देश की सबसे पुरानी पार्टी के साथ विपक्षी गुट को जो बढ़त हासिल करने की उम्मीद कर रहा था, उसमें सफलता मिलती नहीं दिख रही है। उन्होंने कहा कि अगला कदम उठाए जाने से पहले सभी कारकों को ध्यान में रखा जाएगा।
जयंत पर भी संशय
सूत्रों ने दावा किया था कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की तरह रालोद प्रमुख जयंत चौधरी भी बुधवार को दिल्ली में इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल नहीं हो सकते हैं। कांग्रेस की सहयोगी रालोद को राजस्थान चुनाव में सिर्फ एक सीट (भरतपुर) दी गई। भरतपुर से रालोद कैंडिडेटऔर अशोक गहलोत सरकार में पूर्व मंत्री सुभाष गर्ग जीते। पार्टी ने राजस्थान के जाट बहुल क्षेत्रों में कम से कम छह सीटें मांगी थीं, लेकिन कांग्रेस ने इससे इनकार कर दिया। आरएलडी के एक शीर्ष नेता ने पुष्टि की कि यूपी में समाजवादी पार्टी के साथ पार्टी का गठबंधन बरकरार है।
सूत्रों ने कहा कि आरएलडी को लगता है कि राजस्थान के रिजल्ट से उसकी स्थिति में सुधार हुआ है। खासकर, पश्चिमी यूपी में जहां वह लगातार अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी को मुख्य जाट वोट बैंक के साथ-साथ मुसलमानों के बीच पकड़ बनाने में मदद मिलती दिख रही है। इस इलाके में इस वर्ग की अच्छी- खासी मौजूदगी है। आरएलडी सूत्रों ने कहा कि पार्टी युवा जाट मतदाताओं को वापस लाने की कोशिश कर रही है। वे पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की ओर चले गए थे।











