द डिप्लोमेट ने अपनी रिपोर्ट में म्यांमार में तीन भारतीयों की हत्या को अजीब घटनाक्रम कहा है क्योंकि विद्रोही गुट इस पर साफ-साफ कुछ कहने की स्थिति में नहीं है। इन तीनों भारतीय नागरिकों को 17 मार्च को म्यांमार के चिन राज्य के तेदिम में पीडीए ने गिरफ्तार किया गया था। प्रतिरोधक समूह 'पीपल्स डिफेंस आर्मी' (PDA) ने इनको संदिग्ध तरीके से घूमने के आरोप में पकड़ा था।
भारत से सटा है तेदिम इलाका
म्यांमार का तेदिम क्षेत्र भारत के मिजोरम राज्य के सीमावर्ती शहर जोखाव्थर से 80 किलोमीटर पूर्व में है। यहां जोमी समुदाय के लोग रहते हैं। PDA के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने द डिप्लोमैट को बताया कि इन तीनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। उनके दस्तावेज (भारतीय वोटर आईडी कार्ड और मिजोरम जाने के लिए भारतीय नागरिक का परमिट) जब्त कर लिया गया था।वोटर आईडी कार्ड से उनके नाम अफ्तार हुसैन मजूमदार, जहांगीर मिर्जा और आरफिक रहमान खान सामने आए थे। मजूमदार और मिर्जा असम के कछार जिले के रहने वाले थे। आरफिक खान पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर के निवासी थे। तीनों ने जोखाव्थर से तेदिम जाने के लिए एक सफेद कार का इस्तेमाल किया था। PDA ने इस गाड़ी को भी जब्त किया था।
गोलीबारी में हुई मौत!
PDA के पदाधिकारी के मुताबिक, इन तीनों भारतीय नागरिकों ने तकिए और गद्दे बेचने की संभावनाएं तलाशने के लिए तेदिम आने की बात कही थी।हम उनकी बातों और जवाबों से कुछ तय नहीं कर पाए। ऐसे में हमने एक लंबी पूछताछ के बाद फैसला किया कि गाड़ी को जब्त कर लिया जाए और इन तीनों को सीमा पर छोड़ दिया जाए। इसके एक दिन बाद इनकी मौत की बात सामने आ गई।PDA का आरोप है कि उन तीनों भारतीय नागरिकों को दूसरे संगठन के अधिकारियों ने पहले यातनाएं दीं और फिर बहुत करीब से गोली मारकर हत्या कर दी। इस इलाके में सक्रिय एक और विद्रोही संगठन के एक अधिकारी ने इस संभावना से इनकार नहीं किया है कि दोनों समूहों के बीच हुई गोलीबारी में इन लोगों की जान गई हो।











