भारत के पड़ोसी को 4 मिलियन डॉलर का हाईटेक सैटेलाइट सिस्टम देगा अमेरिका, किसकी होगी न‍िगरानी?

भारत के पड़ोसी को 4 मिलियन डॉलर का हाईटेक सैटेलाइट सिस्टम देगा अमेरिका, किसकी होगी न‍िगरानी?
कोलंबो/वॉशिंगटन: अमेरिका भारत के एक और पड़ोसी देश श्रीलंका को सैटेलाइट सर्विलांस सिस्टम देगा। अमेरिका ने श्रीलंका की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत श्रीलंका नौसेना को एडवांस्ड 'फ्लीट ब्रॉडबैंड' सैटेलाइट कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी दी जाएगी जिसका मकसद दुनिया के सबसे व्यस्त शिपिंग रूट पर कनेक्टिविटी को मजबूत करना है। यह घोषणा कोलंबो पोर्ट पर SLNS गजबाहु जहाज पर दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के लिए अमेरिकी असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ स्टेट पॉल कपूर ने की है। यह घोषणा द्विपक्षीय समुद्री सहयोग को गहरा करने पर केंद्रित एक उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान की गई है।

श्रीलंका की मीडिया के मुताबिक डिप्टी डिफेंस मिनिस्टर मेजर जनरल अरुणा जयसेकरा (रिटायर्ड) और श्रीलंका नौसेना कमांडर वाइस एडमिरल कंचना बानागोडा ने नौसेना के जहाज पर अमेरिका के असिस्टेंट सेक्रेटरी समीर कपूर का स्वागत किया। वहां समुद्री सुरक्षा बढ़ाने, ऑपरेशनल तालमेल बेहतर करने और महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों की सुरक्षा के लिए एडवांस्ड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने पर चर्चा हुई।

अमेरिका श्रीलंका को सैटेलाइट सिस्टम देगा

अमेरिका लगभग 4 मिलियन डॉलर यानि 1.2 अरब रुपये से ज्यादा की कीमत वाला एक पूरा 'फ्लीट ब्रॉडबैंड' सिस्टम देगा। इसे श्रीलंका नौसेना के ऑफशोर पेट्रोल जहाजों के बेड़े में लगाया जाएगा। कोभम और इनमारसैट की तरफ से बनाया गया यह सिस्टम नौसेना के कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर में एक बड़ा अपग्रेड है। फ्लीट ब्रॉडबैंड टेक्नोलॉजी सुरक्षित 'शिप-टू-शिप' और 'शिप-टू-शोर' कम्युनिकेशन मुमकिन बनाती है। यह दूर-दराज के समुद्री इलाकों में भी भरोसेमंद वॉयस, डेटा और रियल-टाइम जानकारी शेयर करने की सुविधा देती है।

इस सिस्टम से श्रीलंका नौसेना के जहाज तटीय सीमाओं से दूर काम करते हुए भी हेडक्वार्टर, एयरक्राफ्ट और दूसरे जहाजों के साथ बिना रुकावट कनेक्टिविटी बनाए रख सकेंगे। श्रीलंका के अधिकारियों ने बताया कि इस बेहतर क्षमता से समुद्री क्षेत्र की जानकारी (मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस) काफी बेहतर होगी, हिंद महासागर के बड़े इलाकों में निगरानी मजबूत होगी और इमरजेंसी (जैसे आपदा राहत ऑपरेशन) के समय तेजी से और बेहतर तालमेल के साथ कार्रवाई करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा यह प्रतिबंधित जहाजों को ट्रैक करने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अहम ग्लोबल शिपिंग रूट की सुरक्षा करने में भी मदद करेगा।

भारत के किन पड़ोसी देशों को ये क्षमता दे चुका है अमेरिका

अमेरिका इससे पहले मालदीव को ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) सिस्टम बनाने में मदद कर चुका है। अमेरिका ने मालदीव को 'मर्चेंट शिप इंफॉर्मेशन सिस्टम' (MSIS) से जोड़ा है जिसके जरिए मालदीव को हिंद महासागर में जहाजों की आवाजाही का लाइव सैटेलाइट डेटा मिलता है।

अमेरिकी नौसेना के विशेष प्रोग्राम (PMW 740) के तहत बांग्लादेश में एक उन्नत बॉर्डर और कोस्टल सर्विलांस सिस्टम तैयार किया गया है। इसके तहत नेशनल कमांड सेंटर, रडार और अमेरिकी सॉफ्टवेयर को आपस में जोड़ा गया है जो सैटेलाइट इनपुट के जरिए समुद्री रास्तों की रियल-टाइम ट्रैकिंग करते हैं।
Advertisement