बांग्लादेश की बनी दूसरे सबसे बड़ी पार्टी
इस साल की शुरुआत में बांग्लादेश में हुए आम चुनावों में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशलिस्ट पार्टी (BNP) ने 200 से ज्यादा सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया। इसी चुनाव में जमात-ए-इस्लामी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और इसने 68 सीटें जीतीं। संसद में जमात और एनसीपी गुट के पास कुल 77 सीटें हैं। जमात-ए-इस्लामी का भारत विरोधी एजेंडा किसी से छिपा नहीं है।वहीं, तारिक रहमान के पद संभालने के बाद से भारत और बांग्लादेश के संबंधों में सुधार हुआ है। हालांकि, कई मुद्दों पर अभी भी ध्यान दिए जाने की जरूरत है, इसके बावजूद दोनों देशों के बीच बातचीत और संपर्क बना हुआ है। मतभेदों के बावजूद रहमान भारत के साथ मजबूत संबंध बनाए रखने की अहमियत समझते हैं।
भारत-बांग्लादेश संबंधों को खराब करने की कोशिश
वहीं, पाकिस्तान की ISI के संबंध रखने वाली जमात-ए-इस्लामी भारत-बांग्लादेश के संबंधों में प्रगति से खुश नहीं है और इसे कमजोर करने की कोशिश कर रही है। लेकिन वह खुद को एक जिम्मेदार विपक्ष भी दिखाना चाह रही है। यही वजह है कि सीधे तौर पर शामिल होने के बजाय वह छोटे सहयोगी समूहों और संगठनों के जरिए अपना मकसद पूरा करने की कोशिश कर रही है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों को खराब करने की कोशिश
वहीं, पाकिस्तान की ISI के संबंध रखने वाली जमात-ए-इस्लामी भारत-बांग्लादेश के संबंधों में प्रगति से खुश नहीं है और इसे कमजोर करने की कोशिश कर रही है। लेकिन वह खुद को एक जिम्मेदार विपक्ष भी दिखाना चाह रही है। यही वजह है कि सीधे तौर पर शामिल होने के बजाय वह छोटे सहयोगी समूहों और संगठनों के जरिए अपना मकसद पूरा करने की कोशिश कर रही है।प्रॉक्सी समूह कर रहे भारत विरोधी प्रदर्शन
अधिकारियों का कहना है कि जमात के इशारे पर कई प्रॉक्सी समूह उभर रहे हैं, ताकि दोनों देशों के संबंधों में तनाव पैदा किया जा सके। ये संगठन पर अब जमीन पर एक्टिव हो चुके हैं। 19 जून को बांग्लादेश आजाद पार्टी नाम के एक संगठन ने ढाका में विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन भारत से अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश वापस भेजे जाने के विरोध में किया गया था। प्रदर्शन के दौरान भारत के गृह मंत्री अमित शाह का पुतला फूंका गया।एक्सपर्ट का कहना है कि भारत की अवैध बांग्लादेशियों को वापस भजने के प्रयासों को जमात जैसे कट्टरपंथी समूह राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। वे ऐसे संगठनों को बनाने के लिए बढ़ावा दे रहे हैं, जिनका काम भारत-विरोधी अभियान और गतिविधियां चलाना है।











