प्रकाशन के लिए भेजा गया प्रारूप
समान नागरिक संहिता के प्रारूप को तैयार किए जाने के बाद प्रकाशन के लिए भेज दिया गया है। समिति ने देश में लागू पर्सनल लॉ का परीक्षण किया। देखा गया कि इनमें बदलाव की जरूरत है या फिर समान नागरिक संहिता लागू करने की आवश्यकता है। कमिटी ने इस मसले पर गहन मंथन की। 63 बैठकों का आयोजन किया गया। हर वर्ग की राय के लिए उप समिति का गठन किया गया। जस्टिस रंजना देसाई ने दावा किया है कि सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, विभिन्न धर्मों के जानकारों और संवैधानिक संस्थाओं की राय के आधार पर ड्राफ्ट को फाइनल रूप दिया गया है। प्रकाशन के बाद कमिटी की ओर से ड्राफ्ट सरकार को सौंप दिया जाएगा। इसके आधार पर सरकार उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू कर सकती है।मुस्लिम देशों में लागू कानूनों की भी हुई समीक्षा
जस्टिस रंजना देसाई ने फाइनल ड्राफ्ट के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि देश के कानून ही नहीं, मुस्लिम देशों में लागू पर्सनल लॉ से संबंधित मामलों की भी समीक्षा की गई। उनकी स्टडी की गई। तमाम लोागों और वर्गों के सुझावों, भावनाओं और बातचीत के आधार पर ड्राफ्ट को तैयार किया गया है। समान नागरिक संहिता के ड्राफ्ट को महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगजनों के हित को ध्यान में रखते तैयार किया गया है।विशेषज्ञ समिति में शामिल सचिव अजय मिश्रा, सदस्य रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद हकोली, मनु गौड़, रिटायर्ड आईएएस शत्रुघ्न सिंह और प्रो सुरेखा डंगवाल ने दावा किया कि समिति के प्रत्येक सदस्य की सहमति इस प्रारूप में समान रूप से शामिल है।











