मिडिल ईस्ट आई के मुताबिक, बीते साल भारत-तुर्की सम्मेलन ने माहौल बदलने का काम किया। यह सम्मेलन इतना सफल रहा कि पाकिस्तानी अधिकारी इसके लिए तुर्की से नाखुश हो गए। हालांकि इसके कुछ समय बाद ही चीजें बदल गईं, जब पहलगाम में आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान और भारत आमने-सामने आ गए और तुर्की इस्लामाबाद के पक्ष में दिखा। अब दोनों देश फिर करीब आ रहे हैं तो एक बार फिर पाकिस्तान परेशान हो सकता है।
क्यों बढ़ा दोनों देशों में तनाव
भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया तो तुर्की ने इसकी मुखालफत की। तुर्की पर पाकिस्तान को सैन्य साजो-सामान भेजने का भी आरोप लगा। हालांकि तुर्की के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने पाकिस्तान को कोई अतिरिक्त मदद नहीं भेजी। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंधों के बारे में सभी को जानकारी है और इसका पूरा रिकॉर्ड मौजूद है।भारत ने कड़ा रुख दिखाया और राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए तुर्की की कंपनी 'सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया' की सुरक्षा मंजूरी रद्द कर दी। यह कंपनी दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु सहित नौ हवाई अड्डों पर परिचालन का काम संभालती थी। इसके बाद एयर इंडिया ने अपने वाइड-बॉडी विमानों के रखरखाव के लिए टर्किश टेक्निक पर अपनी निर्भरता कम करने की योजना की घोषणा की।
रिश्तों की बर्फ पिघली
तुर्की और भारत के संबंध करीब एक साल तक ठप रहे। एक साल बाद बीते महीने अप्रैल में चीजों में बदलाव आया है। पिछले महीने भारत ने अप्रत्याशित रूप से तुर्की को द्विपक्षीय बातचीत के 12वें दौर के लिए आमंत्रित किया। तुर्की के उप विदेश मंत्री बेरिस एकिनसी दिल्ली आए और भारत के विदेश मंत्रालय में सचिव सिबी जॉर्ज के साथ मिलकर बैठकों की अध्यक्षता की।तुर्की के अधिकारियों ने एमईई को बताया कि बैठकें अच्छी रहीं और दोनों पक्षों ने बातचीत को लगातार बनाए रखने में रुचि दिखाई। एक भारतीय अधिकारी ने कहा कि हमने द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने का फैसला किया है। हमारा मानना है कि बातचीत ना करने और गलतफहमियों को गहराने देने से बेहतर बातचीत करना है।
कॉरिडोर और कश्मीर मुद्दा
भारतीय अधिकारियों का कहना है कि कूटनीतिक टकराव के बावजूद वाणिज्यिक संबंध अपेक्षाकृत मजबूत बने रहे। व्यापार के चलते दोनों देश संबंधों को सुधारने में दिलचस्पी रखते हैं। 2023 में भारत ने इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) के लिए एक फ्रेमवर्क पेश किया था, जो समुद्र के रास्ते यूएई तक जाएगा और फिर सऊदी अरब, जॉर्डन और इजरायल में मीन के रास्ते आगे बढ़ेगा।IMEC प्रोजेक्ट खतरे में है क्योंकि यूएई और सऊदी अरब के बीच संबंध तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। ऐसे में तुर्की ने खुद को 'मिडिल कॉरिडोर' के मुख्य स्तंभ के रूप में स्थापित किया है। यह अजरबैजान, जॉर्जिया और आर्मेनिया के रास्ते पूर्वी एशिया को यूरोप से जोड़ता है। भारत ने भी नए कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट में रुचि दिखाई है।











