दो भागों में बंटा क्षेत्र, प्रचार में दिख रहा रंग
पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में होशंगाबाद-नरसिंहपुर लोकसभा क्षेत्र की आठों सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की। इस बार अंतर यही है कि यह लोकसभा चुनाव है। यहीं पर वर्ष 2009 में जनता ने तब कांग्रेस से आए राव उदय प्रताप सिंह को कद्दावर नेता रामपाल के मुकाबले जिताकर सिर-आंखों पर बैठा लिया था। इस बार कांग्रेस ने प्रत्याशी के चयन से मुकाबले को रोचक और कड़ा बना दिया है। कांग्रेस के उम्मीदवार पूर्व विधायक संजय शर्मा भले ही वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल न कर पाए हों लेकिन नरसिंहपुर जिले में उनकी अच्छी पकड़ है। उनके पास संसाधनों और संबंधों की कमी नहीं है। नरसिंहपुर, गाडरवाड़ा, तेंदुखेड़ा और उदयपुरा विधानसभा सीटों में कांग्रेस का अपना मतदाता वर्ग है, जो उन्हें मजबूती दे रहा है। नर्मदापुरम जिले में सिवनी-मालवा, होशंगाबाद, सोहागपुर और पिपरिया भाजपा पट्टी के साथ-साथ वे इलाके हैं, जहां भाजपा की मजबूत पकड़ के साथ दर्शन सिंह चौधरी को व्यक्तिगत रूप से लोग जानते-पहचानते हैं। दोनों पट्टी के चार-चार विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या भी लगभग नौ-नौ लाख के साथ बराबर की है। ऐसे में उम्मीदवार अपनी पट्टी में पांव जमाए रखने के साथ दूसरे के प्रभाव क्षेत्र में मतदाताओं को रिझाने की जुगत लगा रहे हैं।
जतन के अलावा समीकरण जातिगत भी हैं
नर्मदा कछार के समृद्ध किसानों के इलाके में दर्शन सिंह खुद के किसान होने की बात बार-बार दोहरा रहे हैं तो संजय शर्मा भी खुद को किसान का बेटा बताने से पीछे नहीं हैं। कभी समाजवादी गढ़ रहे होशंगाबाद सीट के चुनावों में जाति कभी मुद्दा नहीं रही लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग है। सतह के नीचे जातिगत गोलबंदी भी नजर आ रही है।
जनता की बात
पिपरिया के मंगलवारा बाजार में कपड़े की दुकान चलाने वाले अंकित राय कहते हैं कि प्रचार पर निकलने के बाद दर्शन चौधरी के लिए घर वापस आने की कोई मजबूरी नहीं है। वह संघ के स्वयंसेवक रहे हैं। एक बैग लेकर चलते हैं। रात हुई तो उसी गांव में रुक गए। दो-चार दिन वापस घर न आएं तो कोई अंतर नहीं पड़ता। यहां उन्हें करीब-करीब सभी जानते हैं। संजय शर्मा को यहां ऐसी पहचान के लिए तगड़ा प्रचार करना होगा। इधर, सोमेश परसाई बताते हैं कि प्रधानमंत्री की रैली के बाद माहौल तो बना था लेकिन छिंदवाड़ा में मतदान के दिन दोपहर ही पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ जिस तरह तेजी से पिपरिया आए, संजय शर्मा को साथ लेकर चुनावी सभा की। इससे पता चलता है कि कांग्रेस लड़ाई में मजबूती से खड़ी है।
पांच लाख पार... इस बार नारा है
राजनीतिक विश्लेषक पंकज पटेरिया बताते हैं कि 2019 के लोकसभा चुनाव में सांसद राव उदय प्रताप सिंह रिकार्ड पांच लाख 53 हजार मतों से जीते थे लेकिन तबसे नर्मदा में काफी पानी बह चुका है, तब कांग्रेस ने शैलेंद्र दीवान को टिकट दिया था, जो राव उदय प्रताप के मुकाबले कहीं न कहीं कमजोर प्रत्याशी थे। रिकार्ड बन सकता था और बना। अब भाजपा ने जीत के पांच लाख पार का बेंचमार्क तो बना दिया है लेकिन यह चुनावी मंचों का नारा ज्यादा दिख रहा है। जमीनी स्तर पर लड़ाई एकतरफा कतई नहीं है।
मतदान का दिन होगा निर्णायक
क्षेत्र का माहौल बता रहा है कि मतदान के दिन जो हवा चलेगी, वह निर्णायक होगी। दोनों प्रत्याशी जोर लगा रहे हैं, लेकिन नरसिंहपुर में दर्शन सिंह चौधरी के लिए उल्टी धार पर नाव चलाने जैसे हालात होंगे तो कुछ ऐसी ही हालात संजय शर्मा के लिए इटारसी, नर्मदापुरम, सिवनी विधानसभा क्षेत्र में होंगे, जहां देरी से प्रचार शुरू करने के बीच वह पर्याप्त समय भी नहीं दे पाए हैं। 26 अप्रैल को मतदान के दिन की कड़ी धूप में किस क्षेत्र के और किसके समर्थक ज्यादा बाहर निकलते हैं, कतार में लगते है, वह निर्णायक होगा।











