तीन माह से थी डाका डालने की तैयारी, एप्पल घड़ी से आरोपितों को पकड़ने रेहटी तक पहुंची पुलिस

तीन माह से थी डाका डालने की तैयारी, एप्पल घड़ी से आरोपितों को पकड़ने रेहटी तक पहुंची पुलिस
भोपाल। शाहपुरा बी सेक्टर मकान नंबर 234 में डाका डालने वाले चारों आरोपितों को पुलिस ने बुधवार को कोर्ट में पेश कर 14 अप्रैल तक रिमांड ले लिया है और नाबालिग नौकर को परामर्श के बाद बाल सुधार गृह भेज दिया है। इधर, पुलिस ने वारदात में शामिल चारों आरोपितों से पूछताछ की तो चौंकाने वाले राजफाश हुए।परिवार के ड्राइवर 24 वर्षीय लक्ष्मण सिंह कीर करीब तीन माह से मकान को लूटने की तैयारी कर रहा था। उसने अपनी प्लानिंग में नाबालिग नौकर को शामिल कर लिया था। बदमाश पहले चार अप्रैल को घटना करने वाला था, लेकिन लक्ष्मण को अचानक परिवार के साथ चित्रकूट जाना पड़ा, इस कारण से इस प्लान को बदल दिया।

इधर, बदमाश लूटी गई रकम के साथ एक एप्पल की महंगी घड़ी भी अपने साथ लेकर गए थे। जब पीड़ित परिवार घर पहुंचा तो उनको लूटी गई रकम के साथ महंगी घड़ी नहीं मिली तो स्वजन ने एप्पल के फोन से अटैच एप्पल वाच को सर्च किया तो उसकी लोकेशन ट्रेस हो गई। स्वजन की सूचना पर आरोपितों की तलाश में पुलिस रेहटी तक पहुंच गई थी। हालांकि बदमाश पुलिस के पहुंचने से पहले ही निकल गए थे।

बता दें कि शाहपुरा निवासी ज्ञानेंद्र सिंह परिहार के मकान में आठ अप्रैल की रात छह बदमाशों ने घर में घुसकर घर के नौकर धर्मेंद्र परिहार और उसकी पत्नी के साथ मारपीट की, फिर कमरे में बंद कर घर से करीब 50 लाख रुपये और सोना-चांदी के आभूषण लूटकर फरार हो गए थे।
इस वारदात में नाबालिग नौकर और उसका चचेरा भाई भी शामिल था। बाद में पुलिस ने नाबालिग नौकर और उसके चचेरे भाई लक्ष्मण कीर के साथ रायसेन निवासी अमित राठौर, संतोष जागंड़े, सोनू अहिरवार को गिरफ्तार कर लिया था। उनके पास से 49 लाख रुपये की बरामद कर लिए थे, बाकी एक लाख रुपये और सोना-चांदी के जेवरात बरामद करने के लिए उनको रिमांड पर लिया गया है।
चार अप्रैल तय था दिन
पुलिस ने आरोपितों से पूछताछ की तो पता चला कि लक्ष्मण करीब तीन माह इस घटना की साजिश रच रहा था, उसे इस वारदात में लूटे गए रकम से पांच लाख रुपये मिलने वाले थे। उसने साथियों के साथ मिलकर चार अप्रैल का दिन तय कर लिया था, लेकिन ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह की बहन चित्रकूट में रहती हैं।
उनके यहां पर देवी भागवत का आयोजन था। उसमें ज्ञानेंद्र प्रताप, उनकी पत्नी, छोटी बेटी के साथ ड्राइवर लक्ष्मण को ले गए थे। इधर, घर पर अकेली बेटी डा. अंशुल और उसके नौकर धर्मेंद्र और उसकी पत्नी सुमन व नाबालिग नौकर था। डा अंशुल ने नाबालिग नौकर को उसकी मां के पास भेज दिया था। इस कारण लक्ष्मण ने प्लान बदल दिया।

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