केंद्र सरकार ने एथेनॉल प्रोडक्शन के लिए गन्ने के जूस के उपयोग पर रोक लगा दी है। एथेनॉल सप्लाई ईयर (ESY) 2023-24 के लिए यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू होगा। सरकार ने इस फैसले की जानकारी गुरुवार 7 अक्टूबर को एक नोटिफिकेशन के जरिए दी है।
शक्कर की कीमतों को कंट्रोल में रखने के लिए सरकार ने यह फैसला किया है। हालांकि, चीनी मीलों के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और CEO को लिखे लेटर में कहा है कि मिलों में ब्लेंडिंग की जरूरतों और ऑयल मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों (OMC) के मौजूदा ऑर्डर को पूरा करने के लिए B-हैवी मोलासिस से एथेनॉल का प्रोडक्शन जारी रहेगा।
सरकार ने ₹10 प्रति क्विंटल बढ़ाया था FRP
इस साल की शुरुआत में सरकार ने अक्टूबर से शुरू 2023-24 फसल सीजन के लिए गन्ने के फेयर एंड रिमुनरेटिव प्राइस (FRP) को ₹10 प्रति क्विंटल बढ़ाकर ₹315 प्रति क्विंटल कर दिया था। FRP वह मिनिमम या न्यूनतम कीमत होता है, जिसे मिलों को गन्ना उत्पादकों को देना ही होता है।
मौजूदा 2022-23 मार्केटिंग ईयर में शुगर मिलों ने 3,353 लाख टन गन्ना उत्पादकों से खरीदा है, जिसकी कीमत ₹1.11 लाख करोड़ से ज्यादा है। वहीं 10 साल पहले 2013-14 मार्केटिंग ईयर में मिलों ने 57,104 करोड़ का गन्ना खरीदा था।
सरकार ने कहा- चीनी का पर्याप्त स्टॉक
इससे पहले सरकार ने अक्टूबर में कहा था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीनी की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बावजूद देश में इसकी खुदरा कीमतें स्थिर हैं। फिलहाल घरेलू स्टॉक में मौजूदा जरूरतों के लिए और आने वाले फेस्टिवल सीजन के लिए शक्कर के स्टॉक में कोई कमी नहीं है।
अगस्त 2023 में हुए 83 लाख मीट्रिक टन का प्रोडक्शन और अक्टूबर 2023 में पेराई होने के बाद चीनी का स्टॉक काफी बेहतर हो जाएगा। इसके अलावा सरकार ने डोमेस्टिक बिक्री कोटा की पहली किश्त भी जारी कर दी है। इसे चीनी मिलें अभी से ही बेचना शुरू कर सकती हैं। सरकार ने कहा है कि इसके लिए कोटा और बढ़ाई जाएगी।











