राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी स्थापना के सौ वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक बहुत ही व्यापक अभियान चला रहा है जिसमें वह अपने संघर्ष की दास्तां के सम्बंध में विस्तार से जानकारी दे रहा है।इस अभियान मेरे घर-घर जाकर लोगों से सीधा सम्पर्क किया जा रहा है और उन्हें संघ की सौ वर्ष की यात्रा, गतिविधियों व योजनाओं की जानकारी दी जायेगी। इसका उद्देश्य पंच परिवर्तन संदेश जन-जन तक पहुंचाना है जिसमें सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी आचरण और नागरिक कर्तव्य शामिल होंगे। चुनाव आयोग द्वारा जो एसआईआर कराई जा रही है उसको लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक कड़ा पत्र लिखकर आयुक्त की भूमिका को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की है तो उसका उत्तर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दिया है। इस प्रकार ममता बनर्जी और अमित शाह आमने-सामने आ गये हैं। इस अभियान को कांग्रेस और इंडिया ब्लाक कितनी गंभीरता से ले रहा है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी स्वयं बीएलओ बन गये हैं।
संघ अपनी स्थापना के सौ वर्ष को शताब्दी वर्ष के रुप में मना रहा है और वृहद जनसंपर्क अभियान इसके लिए चलेगा। देश भर में चलने जा रहे इस अभियान के तहत मध्यप्रदेश में भी व्यापक योजना तैयार कर ली गयी है और स्वयं सेवक घर-घर जाने भी लगे हैं। संघ का दावा है कि वृहद गृह-संपर्क एक प्रकार से अब तक का विश्व का सबसे बड़ा अभियान होगा। संघ ने ऐसे अभियान की कल्पना की है जिसकी तैयारियां तेजी से हो रही हैं। हर शाखा स्तर पर तीन-तीन लोगों की करीब तीन या चार टोलियां बनाई गई हैं। इनके कार्यकर्ता गली-मोहल्लों में रहने वाले परिवारों के सदस्यों को समय की अनुकूलता पर उनके घर जाकर संपर्क करेंगे। जो साहित्य लोगों को दिया जा रहा है उसमें हिन्दू दर्शन में व्यक्तित्व विकास पर भैयाजी जोशी का व्याख्यान, गुरुत्व यानी हिंदुत्व पर सुरेश सोनी द्वारा लिखी पुस्तक और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ यात्रा के सौ वर्ष पर पुस्तक शामिल है। इसके साथ ही एक फोल्डर भी दिया जा रहा है जिसमें मध्यभारत प्रान्त संगठन व सेवा के सौ वर्ष की गतिविधियां शामिल हैं और इसमें आह्वान किया गया है कि ‘संगठन सेवा के सौ वर्ष आओ बनाये समर्थ भारत।‘ इस अभियान से यही प्रतीत होता है कि संघ अब अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने और उनको अपनी विचारधारा से जोड़ने का एक व्यापक अभियान चला रहा है।
ममता और चुनाव आयोग आमने-सामने
ममता बनर्जी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एस .आई .आर .को लेकर विस्तृत एवं कड़ी चिट्ठी लिखकर गहरी आपत्ति दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया को बिना किसी ठोस तैयारी व उचित योजना के लागू कर दिया गया है जिसका सीधा असर आम नागरिकों और बीएलओ कर्मियों पर पड़ रहा है। ममता का कहना है कि एस .आई .आर की शुरुआत से ही मौलिक तैयारी, पर्याप्त योजना, प्रशिक्षित मानव संसाधन और स्पष्ट दिशा-निर्देशों का भारी अभाव रहा है। उनका यह भी आरोप है कि न तो लोगों को सही जानकारी दी गई है और न ही जमीनी स्तर पर काम कर रहे बीएलओ कर्मचारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण मिल पाया, इससे पूरे राज्य में भ्रम और तनाव होने से यह गंभीर रुप से खतरनाक मोड़ रही है। इस वजह से आम लोगों में घबराहट फैल रही है। पहले दिन से ही एस .आई .आर की प्रक्रिया में बुनियादी तैयारियों का अभाव है, न तो पर्याप्त योजना है और न ही संवाद। प्रशिक्षण में गंभीर कमी है और अनिवार्य दस्तावेजों को लेकर कोई स्पष्टता भी नहीं है। ऐसी अव्यवस्थित प्रक्रिया से नागरिक परेशान हैं और बीएलओ कर्मचारियों को असामान्य स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। जिला प्रशासन भी कठिनाइयों को महसूस कर रहा है इसलिए इस पर पुनर्विचार करें।
चुनाव आयोग का ममता के पत्र पर क्या रुख रहता है यह उसके द्वारा उठाये जाने वाले कदमों पर निर्भर करेगा, लेकिन ममता की चिट्ठी पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जवाब देते हुए आरोप लगाया है कि कुछ राजनीतिक दल घुसपैठियों को बचाने पर तुले हुए हैं। बीएसएफ के 61वें स्थापना दिवस पर शाह ने एस .आई .आर को लेकर कहा कि यह आवश्यक है और केन्द्र एक-एक घुसपैठिये को देश से बाहर करेगा। पश्चिम बंगाल की मंत्री शशी पांजा ने पलटवार करते हुए कहा कि शाह सुरक्षा की बात करते हैं लेकिन कश्मीर में पर्यटकों की हत्या एवं दिल्ली में धमाके उनकी विफलता के सबूत है। 2002 का एस .आई .आर दो साल चला था अब दो माह एस .आई .आर का दबाव अमान्य है। ऐसा कहा जा रहा है कि गुजरात में टाप परफार्मिग बीएलओ अरविंद बडेर ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली, एक दिन पूर्व एक अन्य बीएलओ की मौत हो चुकी है।
और यह भी
एस .आई .आर को लेकर राजनीतिक दल कितने गंभीर हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ग्वालियर-चंबल संभाग की बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं व विधायकों को नसीहत देने के अंदाज में कहा कि शादी विवाह छोड़ो पहले वोटर लिस्ट तैयार करो। उन्होंने यह भी कहा कि कई विधायकों की शिकायतें मिल रही हैं कि वे एस .आई .आर के प्रति गंभीर नहीं है। चुघ का कहना था कि एसआईआर चुनाव का अमृत है इसलिए शादी-विवाह, खानपान सहित बाकी सारे काम भूलकर पहले यह काम पूरा करें। इस बैठक में ग्वालियर-चंबल संभाग की सभी 34 विधानसभा सीटों पर वन-टू-वन चर्चा की गयी। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का कहना था कि अब तक एस .आई .आर पर हुआ काम संतोषजनक नहीं है। वर्तमान गति में सुधार नहीं हुआ तो आगे बड़ा चुनावी संकट सामने आ जायेगा, क्योंकि आयोग की समय सीमा नही बढ़ेगी। यह क्षेत्र भाजपा के लिए hai सबसे चुनौतीपूर्ण है जहां पर कि वह बहुत ही कम अन्तर से जीती है, इसलिए दोनों संभागों में काम करने की जरुरत है। जबकि संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा ने कार्यकर्ताओं को चार दिसंबर तक सारे निजी काम छोड़ कर इसमें ही ध्यान देने का निर्देष दिया है। मध्यप्रदेश में तौर पर निश्चित तौर पर एस .आई .आर की प्रक्रिया काफी धीमी है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इससे जुड़े कामों की धीमी गति पर केंद्रीय चुनाव आयोग ने भोपाल, इंदौर, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, भिंड, गुना सहित कई जिलों के कलेक्टरों को फटकार लगाते हुए कहा है कि कोई बहाना नहीं चलेगा, तय अवधि में ही काम पूरे करने होंगे। जहां तक कांग्रेस का सवाल है 400 पदाधिकारियों से कांग्रेस पैंसठ हजार बूथ लेबल एजेंट का सत्यापन करा रही है। इस काम पर नजर रखने के लिए कांग्रेस ने भी 65 हजार 14 मतदान केंद्रों पर बूथ लेबल एजेंट नियुक्त कर दिये हैं।
-अरुण पटेल,
-लेखक, संपादक











