राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (यूआईटी) में विगत वर्षों से लगातार अनुशासनहीनता और आंतरिक विवाद की स्थिति बनी हुई है। इसके डिपार्टमेंट ऑफ कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग के विभाग के दो सहायक प्राध्यापक डॉ. मनीष अहिरवार और उदय चौरसिया पर विभिन्न आरोप लगे हैं, जिनमें संविदा प्राध्यापकों से टकराव, पुनर्नियुक्ति में पक्षपात, वॉक-इन इंटरव्यू में बाधा, छात्रों के मूल्यांकन में दुर्भावना, और शारीरिक झगड़े जैसी घटनाएं शामिल हैं।
एक बार फिर कांट्रेक्ट फैकल्टी द्वारा रेगुलर फैकल्टी पर आरोप लगाए जा रहे हैं। अब यह मुद्दा गत दिवस हुई कार्य परिषद की बैठक में पहुंचा। यूआईटी के डायरेक्टर प्रो. सुधीर सिंह भदौरिया कार्यपरिषद में एक प्रस्ताव बनाकर ले गए और प्रस्ताव को पटल पर रखकर कार्रवाई करने का अनुरोध किया। लेकिन रजिस्ट्रार डॉ. मोहन सेन ने आपत्ति दर्ज कराई और कहा कि इन विषयों में उसी दौरान आपके द्वारा एक्शन क्यों नहीं लिया गया? आपको कार्रवाई करना थी।
ईसी को ये भी बताया... 2023 में प्रो. संजय सिलाकारी की पुत्री शुभ्रा शिलाकारी को जानबूझकर फेल करने के मामले में जांच समिति ने दोनों प्राध्यापकों को दोषी ठहराया। इसी प्रकार 2022 में सिविल इंजीनियरिंग विभाग के संविदा प्राध्यापक देवांश जैन से मारपीट के मामले में रिटायर्ड न्यायाधीश डॉ. दिनेश नायक की रिपोर्ट में भी दोनों को शिक्षक की गरिमा के विपरीत आचरण का दोषी पाया गया।
कार्रवाई करेंगे ... कार्यपरिषद को यह जानकारी दी गई, ताकि बार-बार हो रहे विवादों को को समाधान निकल सके। यूआईटी स्तर से आगे भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हम सब प्रशासन का ही हिस्सा हैं।











