उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों में जुटी मोहन यादव सरकार शिप्रा के दोनों ओर बनाए जाने वाले 29 किमी लंबे घाट का काम शुरू कराने के बाद इसे तेजी से पूरा कराएगी। सरकार को आशंका है कि घाट निर्माण के दौरान विरोध हो सकता है, इसे देखते हुए सरकार जल संसाधन विभाग के जरिये हाईकोर्ट में केविएट दायर करने की तैयारी कर रही है, ताकि निर्माण के विरोध में कोर्ट जाने वालों के आवेदन पर कोर्ट एकतरफा फैसला न दे।
इसको लेकर जल संसाधन विभाग ने नमामि शिप्रे परियोजना क्रियान्वयन इकाई उज्जैन को पत्र लिखकर कहा है कि सिंहस्थ महापर्व 2028 के लिए शिप्रा नदी के दाएं और बाएं तट पर 29.215 किमी घाट का निर्माण किया जाना है। 778.91 करोड़ रुपए की लागत से बनाए जा रहे घाट को लेकर 31 दिसम्बर 2024 पत्र लिखा गया था।
जल संसाधन विभाग के वृहद परियोजना मंडल ने इन घाटों के निर्माण को लेकर 8 मई 2025 को स्कोप ऑफ वर्क के अंतर्गत टेंडर मंजूर कर दिया है। सरकार को आशंका है कि इस काम में बाधा उत्पन्न हो सकती है और निर्माण कार्य के विरोध में कुछ लोग कोर्ट जा सकते हैं।
इंदौर हाईकोर्ट में दायर होगी केविएट
शिप्रा नदी के किनारे सरकार बिना किसी विवाद के निर्माण कार्य पूरा कराने के लिए हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में केविएट दायर करने जा रही है ताकि अगर कोई इसमें बाधा की स्थिति पैदा करना चाहे और कोर्ट जाए तो इसकी जानकारी परियोजना प्रशासक नमामि शिप्रे परियोजना क्रियान्वयन इकाई-2 जल संसाधन विभाग उज्जैन को मिले और विभाग तथा सरकार की ओर से इस पर जवाब दिया सके। ताकि कोर्ट सरकार का पक्ष सुनकर ही फैसला दे।
घाटों पर लगेंगे रामघाट जैसे रेड स्टोन
कान्ह और शिप्रा नदी पर बनाए जाने वाले घाटों पर पहले स्थानीय स्तर पर उपलब्ध स्टोन लगाकर घाट तैयार करने का निर्णय हुआ था, लेकिन बाद में यह तय किया है कि रामघाट के जैसे रेड स्टोन से घाट बनाए जाएंगे। इसलिए इसकी डीपीआर की शर्तों में बदलाव किया है। अन्य काम भी समय पर पूरे करने की तैयारी विभाग ने की है। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि रामघाट जैसे स्टोन का इस्तेमाल पूरे 29 किमी के घाट निर्माण में किया जाएगा।











