मुजफ्फरपुर में खिला स्वर्ग लोक वाला फूल
पुराणों के अनुसार समुद्रमंथन से मिले 14 रत्नों में कल्पवृक्ष भी था। ये इंद्र को दे दिया गया था। इंद्र ने इसे सुरकानन वन में लगाया था। सनातन धर्म मानने वालों का विश्वास है कि कल्पवृक्ष से जिस मुराद की भी याचना की जाए, वो पूरी होती है। ये कभी खत्म नहीं होता है। वैसे, कल्पवृक्ष का पेड़ बेहद दुर्लभ होता है। कहा जाता है कि ये स्वर्गलोग का पौधा है।
शास्त्रों की मानें तो देव लोक और चंद्र लोक पर भी यही कल्पवृक्ष का पौधा है। धरती पर कुछ ही जगह पर कल्पवृक्ष का पेड़ मौजूद है। पेड़ तो फिर भी दिख जाता है, मगर इसका फूल शायद ही कहीं दिखता है। कहा जाता है कि ये स्वर्ग लोक का पौधा है। लोग इस पेड़ में फूल को खिलते हुए देखना ही सौभाग्य मानते हैं।
फूल को खिलते हुए देखना ही सौभाग्य की बात
शास्त्रों की मानें तो देव लोक और चंद्र लोक पर भी यही कल्पवृक्ष का पौधा है। धरती पर कुछ ही जगह पर कल्पवृक्ष का पेड़ मौजूद है। पेड़ तो फिर भी दिख जाता है, मगर इसका फूल शायद ही कहीं दिखता है। कहा जाता है कि ये स्वर्ग लोक का पौधा है। लोग इस पेड़ में फूल को खिलते हुए देखना ही सौभाग्य मानते हैं।











