जेल में बंद दोनों नेताओं के लिए यह एक और झटका था जिन्हें मामले में मौत की सजा हो सकती है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के अध्यक्ष खान ने अपने वकील सलमान सफदर के माध्यम से इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की, जिसमें अटॉर्नी जनरल और गृह मंत्रालय के सचिव यूसुफ नसीम खोखर को प्रतिवादी के रूप में नामित किया गया है। उन्होंने याचिका में दलील दी कि न्यायाधीश ने ‘जल्दबाजी’ में आदेश दिया। याचिका में कहा गया, ‘ऐसा प्रतीत होता है कि न्यायाधीश की ओर से आरोप तय करने और सुनवाई समाप्त करने में हड़बड़ी दिखाई गई। यह ध्यान दिया जा सकता है कि आरोपपत्र हाल में अदालत में दाखिल किया गया और इसके शीघ्र निष्कर्ष के लिए या दिन-प्रतिदिन सुनवाई करने के लिए कोई निर्देश नहीं है।’
क्या है मामला
उन्होंने कहा कि विशेष अदालत ने शासकीय गोपनीयता अधिनियम की धारा 5 के तहत आरोप तय किए थे, जो ‘कानून का सरासर उल्लंघन है।’ खान ने दलील दी कि न्यायाधीश ने मुख्य दस्तावेजी साक्ष्य की गैरमौजूदगी में आरोप तय करके बिलकुल अवैध सुनवाई की। याचिका में उच्च न्यायालय से आरोप तय करने की ‘जल्दबाजी में की गई कवायद’ को ‘अवैध, गैरकानूनी और दंड प्रक्रिया संहिता के स्थापित सिद्धांतों के खिलाफ’ घोषित करने का आग्रह किया गया।पिछले साल मार्च में वाशिंगटन में देश के दूतावास की ओर से भेजे गए एक गोपनीय राजनयिक दस्तावेज का खुलासा करके शासकीय गोपनीयता अधिनियम का उल्लंघन करने के आरोप में खान के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद अगस्त में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) ने 30 सितंबर को खान और कुरैशी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जिन्होंने इसकी प्रतियों पर हस्ताक्षर किए।











