केसीआर रहे आंध्र से अलग तेलंगाना के फैक्टर'तेलंगाना' नाम क्यों पड़ा?
तेलंगाना का जो मुख्य अर्थ है वह माना जाता है तेलुगु भाषियों की भूमि। इस बात को भी लेकर जानना जरूरी है कि आखिरकार राज्य का नाम तेलंगाना ही क्यों पड़ा? माना जाता है कि साक्षात भगवान शिव इस जगह पर तीन पर्वतों पर लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। इन पर्वतों में मल्लिकार्जुन, द्राक्षाराम और कालेश्वरम, शामिल है। यह पूरा क्षेत्र इन्ही पर्वतों की सीमा के बीच बसा है। इसीलिए इस विशेष क्षेत्र को त्रिलिंग देश भी कहा गया। यहां की भाषा इसी आधार पर तेलुगु कहलाई। यही वजह थी रही कि धीरे-धीरे बदलते दौर में राज्य का नाम तेलंगाना पड़ गया है।तेलंगाना के लिए हुआ आंदोलन
साल 1956 में तेलंगाना को आंध्र प्रदेश राज्य में विलय कर दिया गया था, जिसके बाद इसे अलग राज्य बनाए जाने के लिए आंदोलन हुआ। तब कहीं जाकर दशकों की लड़ाई के बाद दो जून, 2014 को तेलंगाना को राज्य के रूप में एक अलग पहचान मिल पाई। हैदराबाद में निजामों का राज था और उनके नुमाइंदे तेलंगाना के किसानों से जबरन कर वसूला करते थे। यह एक तरीके का किसानों के खिलाफ दमन था, जिसे कम्युनिस्टों का साथ मिलने के बाद बड़े किसान विद्रोह के रूप में देखा गया।
केसीआर का पूरा नाम कल्वाकुंतला चंद्रशेखर राव है। उनका जन्म 17 फरवरी, 1954 को हुआ था। केसीआर तेलंगाना के वर्तमान मुख्यमंत्री हैं। इसके साथ ही वे Bharat Rashtra Samithi के प्रमुख भी हैं। केसीआर तेलंगाना के मेदक जिले के गजवेल विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। माना जाता है कि आंध्र से अलग तेलंगाना राज्य की लड़ाई के लिए केसीआर ने बड़ी भूमिका निभाई थी। यही वजह है कि केसीआर की दीवानगी आज भी उनके समर्थकों में बढ़-चढ़कर बोलती है।











