टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने इस्तीफा दिया, AGM से पहले उठाया बड़ा कदम
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12 Aug 2026, 03:56 PM
नई दिल्ली: एन चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही उनका लगभग एक दशक लंबा कार्यकाल अचानक खत्म हो गया है। सूत्रों के मुताबिक 63 साल के चंद्रशेखरन ने टाटा संस बोर्ड को अपने फैसले के बारे में बता दिया है। वह फरवरी 2027 तक चेयरमैन के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा होने तक पद पर बने रहेंगे। उन्हें 2017 में टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया था और 2022 में दूसरा कार्यकाल दिया गया था।माना जा रहा है कि चंद्रशेखरन के इस तरह अचानक हटने से देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने पर बुरा असर पड़ेगा। वह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा मोटर्स और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसी कई टाटा कंपनियों के चेयरमैन हैं। चंद्रशेखरन का यह फैसला 18 अगस्त को होने वाली बैठक और टाटा संस में लगभग 66% हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स के वोटिंग के तरीके को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच आया है।चंद्रशेखरन की उपलब्धि
एन चंद्रशेखरन ने TCS का नेतृत्व करने के बाद 2017 में टाटा संस की कमान संभाली थी। यह पहला मौका था जब टाटा परिवार के बाहर के किसी व्यक्ति को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। चंद्रशेखरन के कार्यकाल के दौरान टाटा ग्रुप ने काफी प्रगति की है। ग्रुप के आंकड़ों के मुताबिक उसका कुल रेवेन्यू FY20 में ₹7.89 लाख करोड़ था जो FY26 में ₹16.24 लाख करोड़ हो गया। इस दौरान ग्रुप का नेट प्रॉफिट पांच गुना से ज्यादा बढ़कर ₹32,000 करोड़ से ₹1.71 लाख करोड़ हो गया।टाटा की लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप FY20 में ₹9.31 लाख करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹24.39 लाख करोड़ हो गया। उनकी अगुवाई में टाटा ने एयर इंडिया को खरीदा और सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और बैटरी के क्षेत्र में विस्तार किया। साथ ही डिजिटल बिजनेस और इलेक्ट्रिक वाहनों पर भी अपना ध्यान बढ़ाया।नोएल टाटा से रिश्ते
चंद्रशेखरन के कार्यकाल में ग्रुप ने जो विस्तार किया, उसके लिए भारी निवेश की जरूरत पड़ी। नए बिजनेस के परफॉर्मेंस और कैपिटल की जरूरतों को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के भीतर मतभेद पैदा हुए। सूत्रों के मुताबिक टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा द्वारा नए बिजनेस के परफॉर्मेंस पर सवाल उठाए जाने के बाद टाटा संस बोर्ड ने 24 फरवरी को चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर फैसला टाल दिया था। 2024 में रतन टाटा के निधन के बाद से ही टाटा ग्रुप के भीतर व्यापक मतभेद चल रहे थे।नोएल टाटा को चंद्रशेखरन के बने रहने का विरोधी माना जाता है। इस बात को लेकर भी अनिश्चितता थी कि टाटा संस की एजीएम हो पाएगी या नहीं। टाटा संस के मुख्य शेयरधारकों में से एक सर रतन टाटा ट्रस्ट को महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने जांच पूरी होने तक अहम फैसले लेने से रोक रखा है। टाटा संस के 'आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन' के तहत सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट द्वारा संयुक्त रूप से नॉमिनेट किए गए ट्रस्टी AGM में वोट देने के लिए अधिकृत हैं।
क्यों दिया रिजाइन?
र रतन टाटा ट्रस्ट के कुछ ट्रस्टियों ने बैठक में शामिल होने के लिए चैरिटी कमिश्नर से अनुमति मांगी है। इनमें नोएल टाटा, डेरियस खंबाटा और जहांगीर जहांगीर शामिल हैं। हालांकि विजय सिंह और वेणु श्रीनिवासन ने इस अनुरोध पर हस्ताक्षर नहीं किए। इस अनिश्चितता के कारण एक विवादित वोटिंग की संभावना बन गई थी, जिससे चंद्रशेखरन की चेयरमैनशिप अचानक खत्म हो सकती थी। अब उस प्रक्रिया के आगे बढ़ने से पहले ही उन्होंने पद छोड़ दिया है।