रियाद: यूक्रेन युद्ध के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बुधवार को अपने दुर्लभ विदेश दौरे पर निकले। पुतिन ने खाड़ी के दो सबसे अहम देशों यूएई और सऊदी अरब की यात्रा की। पुतिन ने सबसे पहले यूएई के राष्ट्रपति से मिले। अमेरिका के करीबी सहयोगी देश यूएई में पुतिन के स्वागत के लिए लाल कालीन बिछाई गई थी और हर तरफ रूसी झंडे दिखाई दे रहे थे। इसके बाद रूसी राष्ट्रपति पुतिन सऊदी अरब की यात्रा पर पहुंचे जहां प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने उनका दिल खोलकर स्वागत किया। पुतिन ने खाड़ी देशों की यह यात्रा ऐसे समय पर की है जब इजरायल और हमास के बीच जोरदार युद्ध चल रहा है। यही नहीं इस पूरे इलाके में हजारों की तादाद में अमेरिकी सैनिक और महाविनाशक परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात हैं। अमेरिका और पश्चिमी देशों के इसी खतरे को देखते हुए पुतिन पहली बार देश के सबसे आधुनिक सुखोई-35 फाइटर जेट के साथ खाड़ी देशों की यात्रा पर पहुंचे थे।
सुखोई-35 जेट, हवा में उड़ता किला... अमेरिकी गढ़ में शेर की तरह घुसे पुतिन, सऊदी प्रिंस ने किया स्वागत
दरअसल, यूक्रेन पर हमले की वजह से पुतिन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी कर रखा है और रूसी राष्ट्रपति विदेश यात्राओं से बच रहे हैं। यहां तक कि पुतिन जी-20 सम्मेलन के दौरान भारत की यात्रा पर नहीं आए थे। पुतिन अब तक अपने कई विदेश दौरों को कैंसिल कर चुके हैं। पुतिन खाड़ी देशों की इस यात्रा को अपने Il-96PU विमान के साथ की जिसे चलता फिरता किला कहा जाता है। पुतिन के साथ 4 सुखोई-35 फाइटर जेट चल रहे थे। इन फाइटर जेट ने रूसी राष्ट्रपति की पूरी यात्रा के दौरान साये की तरह से उनकी सुरक्षा की। यूएई और सऊदी अरब ने अभी तक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत के साथ समझौते को मंजूरी नहीं दी है।
रूस के ये चारों ही फाइटर जेट R-77 और R-73 एयर टु एयर मिसाइलों से लैस थे। इससे पहले भी रूस ने वीवीआईपी विमानों को सुरक्षा देने के लिए फाइटर जेट तैनात किए हैं लेकिन इतने देशों के हवाई क्षेत्र से गुजरते हुए पुतिन के विमान Il-96 को सुरक्षा देने के लिए 4 फाइटर जेट ले जाना पहली बार हुआ है। रूसी विमानों की तैनाती पर क्रेमलिन के प्रवक्ता ने कहा कि पुतिन के विमान के दौरे के दौरान 4 सुखोई विमान साथ चल रहे थे जो रूसी हवाई ठिकाने से उड़े थे। इन विमानों पर विभिन्न तरीके के हथियार लगे हुए थे। बताया जा रहा है कि इतने देशों के ऊपर से फाइटर जेट के उड़ान भरने के लिए रूस ने विशेष मंजूरी ली थी।











