राम मंदिर के एनसाइक्लोपीडिया चंपत राय की कहानी केमिस्ट्री के प्रोफेसर थे, 18 महीने जेल में रहे

राम मंदिर के एनसाइक्लोपीडिया चंपत राय की कहानी केमिस्ट्री के प्रोफेसर थे, 18 महीने जेल में रहे

साल 1975। बिजनौर के डिग्री कॉलेज में एक प्रोफेसर बच्चों को केमिस्ट्री पढ़ा रहे थे। तभी अचानक कॉलेज के कॉरिडोर में शोर होने लगा। प्रोफेसर ने देखा तो गेट पर कुछ पुलिसकर्मी खड़े थे। पुलिसवाले कॉलेज के प्रिंसिपल के पास चले गए। थोड़ी देर बाद कॉलेज का चपरासी प्रोफेसर की क्लास में आया और बोला कि आपको प्रिंसिपल बुला रहे हैं।

प्रोफेसर प्रिंसिपल के पास पहुंचे। एक पुलिसवाले ने उनसे कहा कि हम आपको गिरफ्तार करने आए हैं। प्रोफेसर ने पुलिसवाले से कहा, मैं अभी छात्रों को पढ़ा रहा हूं। आप वापस जाइए। मैं अपनी क्लास खत्म करके खुद थाने आ जाऊंगा। पुलिसवाले वहां से वापस चले गए। इसके बाद उन्होंने क्लास खत्म करके वही किया, जो कहा था। वे थाने पहुंच गए। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। वे 18 महीने जेल में बंद रहे। वे प्रोफेसर हैं राम मंदिर के लिए जिंदगी खपा देने वाले चंपत राय।

पिता को देखकर चंपत भी RSS में शामिल हो गए

18 नवंबर 1946। बिजनौर जिले के नगीना कस्बे का सरायमीर मोहल्ला। यहां रामेश्वर प्रसाद बंसल और सावित्री देवी के घर एक बच्चे का जन्म हुआ। नाम रखा चंपत राय। चंपत बचपन से ही शांत स्वभाव के थे। उन्हें पढ़ने-लिखने का भी बहुत शौक था। परिवार भी चाहता था कि वो पढ़ लिखकर उनका नाम रोशन करें।

चंपत के पिता रामेश्वर जीवन के शुरुआती दिनों से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्य थे। उनको अपने पिता की जीवनशैली बहुत प्रभावित करती थी। वे बड़े होकर उनकी तरह ही बनना चाहते थे। बड़े होकर उन्होंने तय किया कि वे भी संघ के सदस्य बनेंगे।

चंपत ने RSS जॉइन कर लिया। संघ के लिए काम करने के साथ-साथ वे अपनी पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान देते थे। चंपत साइंस के स्टूडेंट थे। पढ़ाई करने के बाद वे धामपुर के RSM डिग्री कॉलेज में केमिस्ट्री के प्रोफेसर बन गए।

चंपत राय को गिरफ्तार करने पुलिस कॉलेज पहुंच गई
26 जून 1975। रेडियो पर एक घोषणा हुई। घोषणा करने वाली उस वक्त की पीएम इंदिरा गांधी थीं। उन्होंने कहा, ‘भाइयों और बहनों, राष्ट्रपति जी ने आपातकाल की घोषणा की है।’ इस घोषणा के बाद ही सभी नागरिकों के मौलिक अधिकारों को खत्म कर दिया गया। देश में विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी शुरू हो गई।

इसी दौरान एक दोपहर की बात है। चंपत राय कॉलेज में स्टूडेंट्स को पढ़ा रहे थे। तभी अचानक कॉलेज के कॉरिडोर में शोर हुआ। चंपत ने बाहर देखा तो कुछ पुलिसवाले खड़े थे। उन्होंने इस बात पर ध्यान नहीं दिया और बच्चों को पढ़ाने लगे। कुछ देर बाद कॉलेज का एक चपरासी क्लास में आया और चंपत राय से बोला कि आपको प्रिंसिपल बुला रहे हैं।

चंपत प्रिंसिपल रूम में पहुंचे तो देखा कि पुलिसवाले पहले से ही वहां मौजूद थे। एक पुलिसवाले से चंपत से कहा कि हम आपको गिरफ्तार करने आए हैं। दरअसल, चंपत के विचार मौजूदा सरकार से मेल नहीं खाते थे। इसलिए गिरफ्तारी की लिस्ट में चंपत राय का भी नाम शामिल था।

चंपत ने पुलिस से कहा- बच्चों को पढ़ा कर आता हूं
प्रिंसिपल रूम में जैसे ही पुलिस ने चंपत को गिरफ्तार करने की बात कही, उन्होंने कहा कि अभी मेरी क्लास का टाइम है। आप लोग चलिए, मैं बच्चों की क्लास पूरी करके थाने आ जाऊंगा। पुलिस को पता था कि अगर उन्होंने चंपत की बात नहीं मानी तो कॉलेज के छात्र विरोध करने लगेंगे। पुलिस वहां से चली गई। चंपत क्लास में गए। बच्चों को पढ़ाया और फिर घर जाने के लिए बोल दिया।

इसके बाद वो अपने घर गए। कुछ कपड़े लिए। मां-पिता का आशीर्वाद लिया। किसी को बिना कुछ बताए घर से निकल गए। चंपत कोतवाली पहुंचे। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। चंपत 18 महीने जेल में कैद रहे। आपातकाल खत्म होने के बाद उनकी रिहाई हो गई।

सरकारी नौकरी छोड़कर राम मंदिर आंदोलन में शामिल हो गए

साल 1980। जेल से रिहा होने के बाद चंपत ने अपनी सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। वो पूरी तरह से संघ के प्रचारक बन गए। चंपत से तब सरसंघचालक रहे रज्जू भैया प्रभावित हो गए। उन्होंने राम मंदिर की लड़ाई लड़ने के लिए अयोध्या को तैयार करने की जिम्मेदारी चंपत के कंधों पर डाल दी।

घर-घर जाकर युवाओं को अयोध्या आंदोलन में शामिल किया
इसी दिन के बाद से चंपत राय राम काज में जुट गए। वो अवध के गांव-गांव गए। एक-एक दरवाजा खटखटाया। सभी युवाओं से राम मंदिर आंदोलन में शामिल होने की अपील की। ग्राउंड लेवल पर युवाओं की एक ऐसी फौज खड़ी की, जो राम मंदिर के लिए लड़ने की तैयार थी।

चंपत अयोध्या की हर गली को पहचानते थे और हर गली ने उनको पहचान लिया। उन्होंने अयोध्या और राम मंदिर से जुड़ी एक-एक जानकारी जुटाना शुरू किया। इसके लिए उन्होंने अवध के इतिहास, वर्तमान और भूगोल को खंगाला। उनके साथियों ने उन्हें ‘राम मंदिर का एनसाइक्लोपीडिया’ बुलाना शुरू कर दिया।

चंपत ने इतने डॉक्यूमेंट्स इकट्ठा किए कि पूरा घर पन्नों से भर गया
‌विवादित ढांचा गिराए जाने पहले से ही चंपत ने राम मंदिर से जुड़े डॉक्यूमेंटल एविडेंस इकट्ठा करने शुरू कर दिए। उन्होंने हजारों डॉक्यूमेंट्स पढ़े, एक-एक ग्रंथ पढ़ा और उन्हें अपने पास सहेज कर रखा। उनके पूरे घर में बस राम मंदिर से जुड़े कागजात भरे पड़े थे। मंदिर की जमीन से जुड़ी कई जानकारियां उनको मुंहजुबानी याद हो गई थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राम जन्मभूमि की कानूनी लड़ाई लड़ने वाले वकीलों को भी सबूत चंपत राय ने ही दिए थे।

'ये भगवान राम की वानर सेना है, जो करने आई है, करके जाएगी'
साल 1992। देश में मंदिर के लिए आंदोलन की प्लानिंग चल रही थी। अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को मंच से बड़े-बड़े नेता कारसेवकों को अनुशासन का पाठ पढ़ाने में लगे थे। निर्देशों की लंबी फेहरिस्त तैयार की गई। विवादित ढांचे को नुकसान न पहुंचाने की बातें की जा रही थीं। चंपत राय मंच से दूर भीड़ में खड़े सब सुन रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस वक्त एक पत्रकार ने चंपत राय से पूछा कि अब आगे क्या होगा? इस पर उन्होंने जवाब दिया, 'ये भगवान राम की वानर सेना है। सीटी की आवाज पर पीटी करने नहीं आई है। ये जो भी करने आई है, करके ही जाएगी।' और यही हुआ। उसी दिन कारसेवकों की भीड़ ने विवादित ढांचे को ध्वस्त कर दिया।

इस घटना के बाद देशभर में जगह-जगह सांप्रदायिक दंगे भड़क गए। मुकदमे हुए। मुकदमों में कल्याण सिंह के बाद वे चंपत राय ही थे, जिन्होंने अदालत और जनता, दोनों के ही सामने खुल कर इस घटना का दायित्व अपने ऊपर लिया।

राम मंदिर के एनसाइक्लोपीडिया से लेकर रामलला का पटवारी बनने तक

साल 1991 में चंपत राय को क्षेत्रीय संगठन मंत्री बनाकर अयोध्या भेजा गया। इसके बाद 1996 में वे विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री बनाए गए। साल 2002 में संयुक्त महामंत्री और फिर अंतरराष्ट्रीय महामंत्री बनाए गए। चंपत भगवान राम की सेवा में ऐसा लगे कि उन्होंने शादी भी नहीं की।

अब चंपत राय राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव हैं। वे अपना पूरा जीवन रामलला के चरणों में अर्पित कर चुके हैं। अब लोग प्यार से उन्हें रामलला का पटवारी भी कहते हैं।

22 जनवरी को अयोध्या में भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। इससे जुड़े कार्यक्रम की जिम्मेदारी संभालने वाले लोगों में चंपत राय सबसे मुख्य लोगों में से एक हैं। इस कार्यक्रम में कौन शामिल हो रहा है, कौन नहीं आ रहा है, कार्यक्रम की अवधि, अतिथियों का आगमन स्थल और आम लोगों के लिए दर्शन की तिथि जैसे सवालों के उत्तर चंपत राय दे रहे हैं। कुल मिलाकर इस वक्त प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम की पूरी जिम्मेदारी चंपत राय के कंधों पर है।


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