धर्माधता से दूर रहै, बेफिजूल धार्मिक दिखावटी खर्च को बेहतर जीवन यापन पर लगाये

धर्माधता से दूर रहै, बेफिजूल धार्मिक दिखावटी खर्च को बेहतर जीवन यापन पर लगाये
भारत में अरबो रुपए भिन्न-भिन्न धार्मिक आयोजन पर खर्च होता है। यदि सरकार यही खर्च बच्चों से लेकर युवा और प्रोढ की शिक्षा, उनके दैंदिनी जीवन की जरूरतो, सड़क, बिजली, पानी, स्वच्छता एवं ग्रामीण एवं नगरीय विकास आदी पर ही खर्च करती तो *हम भी यूरोपीय एवं अन्य विकसित देशों की तरह समृद्ध और बेहतर जीवन यापन कर रहै होते।* आज हिंदुस्तान में बहुत बड़ा तबका बहुत गंदगी और कन्जेस्टेड और निम्न स्तरीय माहौल में जीवन यापन कर रहा है एक तरह से कहो तो कहीं-कहीं तो नारकीय और अर्ध नारकीय जीवन व्यतीत कर रहे हैं। झूग्गी झोपड़ी और गंदी बस्तियां हर जगह फैली मिलेगी। हिंदुस्तानियों को उनकी मानसिकता में धार्मिकता का ग्लैमर एवं दिखावटी रूप बिठा रखा है वह धार्मिक क्रिया और आयोजनों में अथाह फिजूल खर्च करते रहते हैं। उनका भ्रम है कि हमें पुण्य मिलेगा हमारे पाप कटेंगे हमारे दुख दूर होंगे जबकि ऐसा कुछ नहीं है *उनके दुख उनके अच्छे कर्मों से दूर होंगे उनके पाप उनके सदकर्मो से दूर होंगे उनका पुण्योदय उनके अच्छाई से ही होगा। जनता को अपने अच्छे बुरे का ज्ञान हो इसलिए उनका शिक्षित होना बेहद आवश्यक है। 
अशोक मेहता, इंदौर (लेखक पत्रकार पर्यावरणविद्)
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