आदमपुर कचरा खंती में ढाई लाख टन कचरे का पहाड़ खड़ा हो गया है, लेकिन नगर निगम के रिकॉर्ड में इस कचरे का निष्पादन हो चुका है। प्रोसेसिंग पूरी मानकर नगर निगम संबंधित कंपनी को लगभग साढ़े सात करोड़ का अतिरिक्त भुगतान भी कर चुका है। खास बात यह है कि आदमपुर छावनी में रोज पहुंचने वाले 850 टन कचरे की प्रोसेसिंग मानकर कंपनी को 333 रु./ टन के हिसाब से पिछले 30 महीने से भुगतान किया जा रहा है। लेकिन कंपनी की एक दिन में अधिकतम क्षमता ही 600 टन कचरा प्रोसेसिंग की है। यानी बाकी कचरा कागजों में प्रोसेस हो रहा है। नगर निगम के अफसर कंपनी को काम से पहले ही भुगतान कर रहे हैं।
ग्रीन रिसोर्स कंपनी ने जुलाई 2020 में आदमपुर छावनी में कचरे की प्रोसेसिंग का काम शुरू किया। प्रोसेसिंग के माध्यम से कंपनी को गीले कचरे से जैविक खाद और सूखे कचरे से सीमेंट और बिजली प्लांट के लिए आरडीएफ यानी ईंधन बनाना था। कंपनी की क्षमता 600 टन कचरा प्रोसेसिंग की है, पर रोज 850 टन कचरा पहुंच रहा है। यानी एक दिन में 250 टन कचरा अतिरिक्त बचा हुआ है। यानी हर महीने 7,500 टन कचरा बचता है। कंपनी ने जब से काम शुरू किया है, तब से 33 महीने में यह लगभग 2.50 लाख टन होता है।
बड़ा सवाल- 41 दिन में कैसे साफ होगी खंती
ग्रीन रिसोर्स कंपनी का कार्यकाल मई 2024 में पूरा हो रहा है। यानी 41 दिन ही बचे हैं। एग्रीमेंट के मुताबिक कंपनी को साइट छोड़ने से पहले पूरा कचरा निष्पादित करना होगा। मौजूदा हालात के हिसाब से देखा जाए तो रोज आने वाले 850 टन कचरे में 250 टन कचरा हररोज बच रहा है और दो लाख टन कचरा पहले से जमा है।
जनवरी में खुला मामला, अब प्रोसेसिंग के बाद ही होगा भुगतान
जनवरी में आदमपुर छावनी में प्रोसेसिंग के लिए टेंडर की प्रक्रिया नए सिरे से शुरू हुई। तब यह बात उजागर हो गई कि यहां कचरे का ऐसा पहाड़ खड़ा हो गया है जो कागज पर प्रोसेस हो चुका है। ऐसे में कोई भी नई कंपनी आएगी तो वह इसके लिए अलग से राशि मांगेगी और वह निगम किस खाते से देगा? इसके बाद बदलाव किया गया। अब कचरे से बने जैविक खाद और आरडीएफ साइट से हटाए जाने के बाद ही भुगतान किया जा रहा है। नगर निगम कमिश्नर हरेंद्र नारायण के अनुसार, दिसंबर तक जितना कचरा निष्पादन के लिए पहुंचता था, उसके हिसाब से भुगतान हो रहा था। होना यह चाहिए कि कचरे से बने जैविक खाद और आरडीएफ साइट से हटने के बाद ही भुगतान होगा। जनवरी से यह व्यवस्था लागू की गई है।
ऐसी भी गड़बड़ी
निगम के उच्चपदस्थ सूत्रों की मानें तो यह भी पकड़ में आया था कि ट्रांसफर स्टेशन से कचरा ले जाने वाले नीले और हरे कैप्सूल जो दोपहर या उसके बाद जाते थे उनमें कचरे का वजन बढ़ाकर भी बताया जाता था। ऐसे में आशंका तो यह भी है कि जितना कचरा निष्पादित होना बताया जा रहा है वास्तव में इतना कचरा न तो साइट पर पहुंचा और निष्पादन हुआ। लेकिन इसके एवज में भुगतान किया गया है।
अतिरिक्त भुगतान वापस कैसे लेगा निगम
नगर निगम के पास कंपनी की बैंक गारंटी 1.8 करोड़ रुपए रखी हुई है। यदि कंपनी पूरे कचरे का प्रोसेसिंग नहीं कर पाती है तो निगम पेनाल्टी लगा सकता है। लेकिन सवाल यह है कि जिस कचरे को प्रोसेस मान लिया गया उस पर पेनाल्टी कैसे लगेगी? ग्रीन रिसोर्स को सितंबर 2023 तक के लिए कचरा निष्पादन का काम दिया गया था। अक्टूबर 2023 में इसे मई 2024 तक के लिए बढ़ाया था। निगम ने कचरा निष्पादन के लिए नई कंपनी अपॉइंट करने के लिए आचार संहिता से पहले टेंडर जारी कर दिया है।











