मध्यप्रदेश की संस्कारधानी कहे जाने वाले जबलपुर में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक में जहां एक ओर जातिगत जनगणना पर इस शर्त के साथ सहमति जताई गई कि राजनीतिक दृष्टिकोण से यह नहीं होना चाहिये। वहीं दूसरी ओर संघ पर प्रतिबंध लगाने की कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मांग पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने उन्हें इतिहास से सबक लेने की नसीहत दी। संघ की बैठक में डेमोग्राफिक असंतुलन को रोकने के लिए राष्ट्रीय जनसंख्या नीति पर भी बल दिया गया। संघ प्रमुख डा. मोहन भागवत ने बैठक के दूसरे दिन कहा कि मतांतरण से न केवल धार्मिक आस्था अवरुद्ध होती है बल्कि समाज की अस्मिता भी नष्ट हो जाती है।
संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की तीन दिवसीय बैठक में 100 साल की संघ की यात्रा पर चिंतन से निकले संदेश और खरगे को नसीहत के साथ ही होसबाले ने कहा कि कांग्रेस को अपने पुराने अनुभव से सबक लेना चाहिये, क्योंकि अभी तक तीन मर्तबा संघ पर प्रतिबंध लगाने के प्रयास हुए हैं और इस पर समाज व न्यायालय ने क्या कहा है इसका भी पता होना चाहिये तथा प्रतिबंध लगाने का कोई कारण तो होना चाहिये। संघ ने डेमोग्राफिक असंतुलन पर चिन्ता जाहिर करते हुए धर्मान्तरण, बांग्लादेश से घुसपैठ, एक समाज की ज्यादा संतानों को इसकी वजह बताया। इसी असंतुलन को दूर करने के लिए राष्ट्रीय जनसंख्या नीति अपनाने पर बल दिया गया। संघ की यात्रा में जबलपुर का भी समावेष हो गया है और यहां हुए विचार मंथन से ही आने वाले वर्षों की दिशा तय होगी। होसबाले ने दावा किया कि समाज का कोई भी समुदाय ऐसा नहीं है जो संघ के सम्पर्क से अछूता हो। आने वाला वर्ष संघ के शताब्दी वर्ष का प्रारंभिक पड़ाव है जिसमें राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता, संगठन विस्तार और जनजागरण पर विशेष जोर दिया जायेगा। जातियों के बीच प्रतिस्पर्धा व धर्म के टकराव के सवाल पर उनका कहना था कि मैं सद्भाव के साथ सभी को एक मंच पर लाने का काम कर रहा हूं। गायत्री परिवार, आर्ट आफ लिविंग, पतंजलि योग जैसी कई आध्यात्मिक संस्थाएं यह काम कर रही हैं। सभी सद्भाव से चलेंगे तो एक बड़ी शक्ति पैदा होगी, जातियों के बीच अहंकार दूर करने के प्रयास भी होने चाहिये। भाजपा से संघ के सम्बन्धों की चर्चा करते हुए उन्होंने यह साफ किया कि कई राजनीतिक दलों में संघ के स्वयं सेवक हैं, संघ वास्तव में नागरिकों का संगठन है। सरकार किसी की भी रहे उनके साथ देश के विषयों पर सम्पर्क रहता है। पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का हवाला देते हुए होसबाले कहते हैं कि लगातार संवाद होता रहता है और संघ के कार्यक्रम में वे शामिल भी हुए। शिक्षा और स्वास्थ्य के निजीकरण व व्यापारीकरण के संबंध में एक सवाल का जवाब देते हुए होसबाले कहते हैं कि पांच साल पहले एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें शिक्षा व स्वास्थ्य सस्ता, सुलभ एवं गुणात्मक हो, इस पर जोर दिया गया था। इसका व्यापारीकरण न हो इसके लिए सरकार को नियम बनाने की आवश्यकता है। संघ को घर-घर तक कैसे पहुंचाया जाए इसकी भी व्यापक नीति तैयार की गई।
तीन दिवसीय बैठक के दूसरे दिन संघ प्रमुख डाॅ. मोहन भागवत ने कहा कि भारत के गौरवशाली स्वाधीनता संग्राम में जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों और योद्धाओं की एक दीर्घ परम्परा रही है और उनका अविस्मरणीय योगदान रहा है। भगवान बिरसा मुंडा का इस स्वतंत्रता संग्राम के श्रेष्ठतम नायकों व योद्धाओं में विशेष स्थान है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले का कहना है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सभी पार्टियों का है लेकिन यहां यह सच है कि हमारे संगठन में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता ज्यादा हैं। चूंकि आज संघ के स्वयं सेवक सरकार में हैं इसलिए हमारे और भाजपा के बीच समन्वय बना हुआ है। आरएसएस का दरवाजा सभी के लिए खुला है। लेकिन यह भी हकीकत है कि भाजपा में घर के ही लोग हैं। संघ ने देश भर के बस्ती मंडलों में हिन्दू सम्मेलन आयोजित करने की संभावना पर भी विचार किया।
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राष्ट्रीय स्वयं संघ अपने शताब्दी वर्ष में हिन्दुओं को एकजुट करने और समाज को कुशल नेतृत्व देने के लिए देश में एक लाख हिन्दू सम्मेलन समितियों का गठन करेगा ताकि लव जिहाद, मतान्तरण या अन्य सामाजिक समस्याओं का निदान स्थानीय स्तर पर ही किया जा सके। इसके लिए ग्राम पंचायत, बस्ती मंडल से लेकर शहर, जिला, संभाग व प्रान्त स्तर पर तेरह सदस्यीय समितियों का गठन किया जायेगा। इन समितियों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष समाज के विषिष्ट जनों को बनाया जायेगा, लेकिन सचिव की जिम्मेदारी संघ के स्वयं सेवक या पदाधिकारी ही संभालेंगे और यह समितियां हिन्दू सम्मेलन आयोजित करेंगी, सम्मेलन की शुरुआत इसी साल20 दिसम्बर से होगी। यह निर्णय जबलपुर मे हुई उक्त बैठक में लिया गया।
-अरुण पटेल, -लेखक, संपादक











