धीरेंद्र शास्त्री के गीता पाठ स्थल के बाहर चिकन पफ बेच रहे थे सलाउद्दीन और रियाजुल, भीड़ ने पीटा, गरमाई बंगाल की सियासत

धीरेंद्र शास्त्री के गीता पाठ स्थल के बाहर चिकन पफ बेच रहे थे सलाउद्दीन और रियाजुल, भीड़ ने पीटा, गरमाई बंगाल की सियासत
कोलकाता : एस्प्लेनेड इलाके में कई सालों से चिकन पफ बेच रहे दो व्यक्तियों ने एफआईआर दर्ज कराई है। दोनों ने आरोप लगाया कि रविवार को मैदान में गीता के सामूहिक पाठ के लिए इकट्ठा हुए लोगों को मांसाहारी भोजन बेचने पर कुछ लोगों ने उन पर हमला किया, धार्मिक गालियां दीं और उनका खाना फेंक दिया। हमला किए गए लोगों में से एक, 50 वर्षीय एसके रियाजुल ने एफआईआर में बताया कि एक दिव्यांग व्यक्ति सहित 8-9 अज्ञात लोगों ने उन पर हमला किया।

60 वर्षीय मोहम्मद सलाउद्दीन ने अपनी एफआईआर में आरोप लगाया कि दो-तीन व्यक्तियों ने उन पर हमला किया। रियाजुल पर हुए हमले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मैदान पुलिस स्टेशन में प्रवेश करने से पहले उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वे आए और मुझसे पूछा, 'क्या आपके पास चिकन पफ हैं?' जैसे ही मैंने अपना नाम बताया, उन्होंने पफ फेंक दिए। उन्होंने मुझ पर हमला भी किया। उन्होंने पूछा, 'आप यहां चिकन पफ क्यों बेच रहे हैं?'

सारा खाना फेंकने का आरोप

हुगली के आरामबाग निवासी रियाजुल ने बताया कि उन्होंने समूह को समझाने की कोशिश की। कहा, 'मैंने उन्हें बताया कि मैं चिकन पफ बेचकर अपना गुजारा करता हूं। मेरे पास 3,000 रुपये का खाना था। उन्होंने सब कुछ फेंक दिया। उन्होंने मेरे कान और कंधों पर मारा। मैंने आज एसएसकेएम अस्पताल के कर्मचारियों को बताया कि मुझे अभी भी दर्द हो रहा है। मैं दवा ले रहा हूं।'

धार्मिक भावनाएं आहत का आरोप

उन्होंने कहा कि लगभग 20 साल पहले एस्प्लेनेड क्षेत्र में स्नैक्स बेचना शुरू करने के बाद यह पहली बार है कि उन्हें इस तरह के हमले का सामना करना पड़ा। रियाजुल ने एफआईआर में लिखा कि हमलावरों ने मुझे थप्पड़ मारे और मुझ पर लात-घूंसे बरसाए, गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी और जानबूझकर अपमानजनक और द्वेषपूर्ण शब्दों का प्रयोग करके मेरी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई

सीपीएम भड़की

तिलजाला रोड निवासी मोहम्मद सलाउद्दीन ने भी अपनी एफआईआर में इसी तरह के आरोप लगाए हैं। सीपीएम नेता और वकील सायन बनर्जी ने घटना के संबंध में एक अलग शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि मैंने सोशल मीडिया पर वीडियो देखा। हमने ऐसी घटनाएं उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में होते देखी हैं, बंगाल में नहीं। इसलिए मैंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि दोनों एफआईआर गैर-जमानती धाराओं के तहत और अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज की गई हैं। हम (वायरल वीडियो की) फुटेज को फोरेंसिक विशेषज्ञों के पास भेज रहे हैं। हमने दोनों पीड़ितों के बयान दर्ज कर लिए हैं। डीसीपी (दक्षिण) प्रियोब्रता रॉय ने बताया कि एफआईआर मैदान पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई हैं। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल नेताओं ने भाजपा पर बंगाल में मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

क्या बोली टीएमसी और बीजेपी

तृणमूल प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि जो लोग मांसाहारी भोजन नहीं खाते, वे इसे न खरीदने का विकल्प चुन सकते हैं। लेकिन विक्रेता पर हमला क्यों? वे वहां विभिन्न वस्तुएं बेचकर अपनी आजीविका कमाते हैं। यह अस्वीकार्य है। बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि गीता पढ़ने वालों को इसका मूल संदेश समझना चाहिए। गीता क्या कहती है? यह सभी के साथ आगे बढ़ने और सभी से प्रेम करने का संदेश देती है। एक तरफ गीता का पाठ हो रहा है, तो दूसरी तरफ एक गरीब व्यक्ति पर हमला किया जा रहा है जो अपनी रोजी-रोटी के लिए चिकन पैटी बेच रहा है। भाजपा की लॉकेट चटर्जी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह सब एक साजिश है। भाजपा का इस घटना से कोई संबंध नहीं है।

हाई कोर्ट पहुंचा मामला

प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि कुछ लोगों को शक हुआ कि दोनों मुस्लिम शख्स चिकन पैटीज बेच रहा है, इसके बाद भीड़ बेकाबू हो गई और उस पर हमला कर दिया। पूरी घटना का परेशान करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मारपीट के अगले ही दिन वकील और सीपीआईएम नेता सायन बनर्जी ने मैदान थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। साथ ही उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर दी। याचिका में कहा गया है कि शहर के बीचों-बीच इतनी बड़ी भीड़ हिंसा बर्दाश्त नहीं की जा सकती। पुलिस अब तक खामोश है और कोई केस तक दर्ज नहीं किया गया।

याचिका में सायन बनर्जी ने लिखा है कि गरीब और असंगठित क्षेत्र का यह विक्रेता पूरी तरह असहाय था। भीड़ ने बिना किसी सबूत या उकसावे के उसकी आजीविका छीन ली। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के तहसीन पूनावाला मामले का हवाला देते हुए कहा कि भीड़ द्वारा हिंसा और हत्या पर सख्त दिशानिर्देश पहले से मौजूद हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल पुलिस उन्हें लागू करने में नाकाम रही है।

वकील ने कोर्ट से मांग की है कि हाईकोर्ट खुद इस मामले का संज्ञान ले, राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब करे, सुप्रीम कोर्ट के लिंचिंग रोकने के दिशानिर्देशों को सख्ती से लागू करने का आदेश दे, पीड़ित को उचित मुआवजा दिलवाए और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए। वहीं, लोगों का कहना है कि धार्मिक आयोजन के नाम पर अगर कोई भी व्यक्ति कानून अपने हाथ में ले सकता है, तो लोग सुरक्षित कैसे रहेंगे? सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कोर्ट इस याचिका पर जल्द सुनवाई करने वाला है।
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