ईरान से जुड़ा प्रस्ताव खारिज
सूत्र की मानें तो भारत ने रूस की तरफ से आए उस प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया है जिसमें ईरान का जिक्र था। रूस की तरफ से प्रस्ताव में ईरान को भारतीय सामान आयात करने और रूस के पास जमा रुपए के भंडार का प्रयोग करने का जिक्र था। भारत का मानना है कि इस प्रस्ताव से कई राजनयिक जोखिम जुड़े हुए हैं। इसके अलावा ईरान फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ग्रे लिस्ट में है। साथ ही यूएई के बैंकों पर पश्चिमी देशों की नजर है। यहां पर होने वाले मुद्रा लेनेदेन की जांच की वजह से रुपए के भंडार को दिरहम में बदलने का रास्ता भी बंद हो चुका है। बिजनेस लाइन ने सूत्रों के हवाले से लिखा है, ' रूस इस समय मजबूर है क्योंकि उसे भारत में जमा रुपए के भंडार को बाहर निकालना मुश्किल हो गया है।
ईरान से क्यों है परहेज
आयात के भुगतान के लिए इसका उपयोग करने में भी वह सक्षम नहीं है क्योंकि गुणवत्ता जैसे मसलों की वजह से वह भारत से ज्यादा खरीद नहीं कर रहा है। ऐसे में अब रूस को सरकारी प्रतिभूतियों और भारतीय इक्विटी बाजार में अधिक निवेश करने पर विचार करना होगा और वह हमेशा इससे परहेज करता आया है।' ईरान इस बात पर राजी था कि रूस से मिली रकम की मदद से वह भारतीय सामान खरीदेगा। ईरान इस बात पर भी राजी था कि रूस से सामान जैसे एयरक्राफ्ट के उपकरण, आयात करके वह अपना अकाउंट पुतिन सरकार के साथ खोल लेगा। मगर भारत ने इसे मानने से इनकार कर दिया है। सूत्रों की मानें तो यह कूटनीतिक तौर पर बुद्धिमान कदम नहीं होता क्योंकि रूस, यूक्रेन युद्ध में ईरानी ड्रोन का प्रयोग कर रहा है।
आयात के भुगतान के लिए इसका उपयोग करने में भी वह सक्षम नहीं है क्योंकि गुणवत्ता जैसे मसलों की वजह से वह भारत से ज्यादा खरीद नहीं कर रहा है। ऐसे में अब रूस को सरकारी प्रतिभूतियों और भारतीय इक्विटी बाजार में अधिक निवेश करने पर विचार करना होगा और वह हमेशा इससे परहेज करता आया है।' ईरान इस बात पर राजी था कि रूस से मिली रकम की मदद से वह भारतीय सामान खरीदेगा। ईरान इस बात पर भी राजी था कि रूस से सामान जैसे एयरक्राफ्ट के उपकरण, आयात करके वह अपना अकाउंट पुतिन सरकार के साथ खोल लेगा। मगर भारत ने इसे मानने से इनकार कर दिया है। सूत्रों की मानें तो यह कूटनीतिक तौर पर बुद्धिमान कदम नहीं होता क्योंकि रूस, यूक्रेन युद्ध में ईरानी ड्रोन का प्रयोग कर रहा है।
रूस के पास जमा रुपया सिर्फ रक्षा खरीद और बिक्री के कारण ही है। भारत रूसी तेल की खरीद कड़ी मुद्राओं का प्रयोग करके कर रहा है। भारत ने रूस से हथियारों और सैन्य उपकरणों को सक्रिय रूप से खरीदना जारी रखा है। रूस की समाचार एजेंसियों के मुताबिक करीब 10 अरब डॉलर की कीमत के ऑर्डर दिए गए हैं। माना जा रहा है कि रूस को अब अपने पास मौजूद रुपए के भंडार को भारत सरकार की प्रतिभूतियों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश करने की आवश्यकता होगी। रूसी कंपनियां भारत में ऑपरेशन शुरू करने पर भी विचार कर सकती है।











