विधायक संजय पाठक की कंपनियों से 520 करोड़ की रिकवरी:कटनी-जबलपुर में अवैध खुदाई पर एक्शन

विधायक संजय पाठक की कंपनियों से 520 करोड़ की रिकवरी:कटनी-जबलपुर में अवैध खुदाई पर एक्शन

मध्यप्रदेश सरकार, कटनी से जुड़ी तीन माइनिंग कंपनियों से 520 करोड़ रुपए की रिकवरी करेगी। इनमें से 440 करोड़ रुपए, खनन की स्वीकृत सीमा से अधिक आयरन अयस्क खुदाई जबकि 80 करोड़ से ज्यादा, जीएसटी चोरी का जुर्माना है। ये तीनों कंपनियां विजयराघवगढ़ से बीजेपी विधायक संजय पाठक से संबंधित हैं।

मामले की जांच करने वाली खनिज विभाग की टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इन कंपनियों ने घोषित माइनिंग प्लान और पर्यावरणीय मंजूरी की सीमा से लाखों टन अधिक खनन किया है। जिन कंपनियों पर यह कार्रवाई हो रही है, उनमें निर्मला मिनरल्स, आनंद माइनिंग और पेसिफिक एक्सपोर्ट शामिल हैं।

इन तीनों फर्मों ने जबलपुर की सिहोरा तहसील के दुबियारा (32.3 हेक्टेयर), घुघरी (8.6 हेक्टेयर), प्रतापपुर (11.5 हेक्टेयर), अगरिया (20.2 हेक्टेयर) और टिकरिया (26 हेक्टेयर) में लौह अयस्क की खदानें संचालित कीं। यहां वर्षों से अवैध रूप से खनन किया जा रहा था, जिस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

खनिज विभाग की टीम ने की थी जांच जनवरी 2025 में व्हिसल ब्लोअर आशुतोष उर्फ मनु दीक्षित ने आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) में शिकायत दर्ज कराई थी। इस पर अप्रैल में खनिज विभाग के प्रमुख सचिव के निर्देश पर बनी जांच टीम ने कई खदानों की पड़ताल की।

टीम ने इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस (आईबीएम) के आंकड़े और सैटेलाइट इमेजरी के जरिए माइनिंग की मात्रा की पुष्टि की। जांच में सामने आया कि निर्धारित रकबे से परे जाकर बड़े पैमाने पर खनन हुआ है।

व्हिसल ब्लोअर बोले- अभी 6 बिंदुओं की जांच बाकी शिकायतकर्ता दीक्षित का कहना है कि सरकार ने फिलहाल अतिरिक्त खनन और जीएसटी चोरी की जांच पूरी की है जबकि अवैध खनन, वन क्षेत्र में खनन, फॉरेस्ट रॉयल्टी में चोरी जैसी गड़बड़ी के छह अन्य बिन्दुओं पर जांच होनी बाकी है।

अगर इन मामलों में ईमानदारी से जांच हुई तो सिर्फ कटनी-जबलपुर क्षेत्र में अवैध खनन की राशि 8 से 10 हजार करोड़ तक पहुंच सकती है।

दस्तावेज और सैटेलाइट डेटा के आधार पर गड़बड़ी साबित जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि इन कंपनियों के दफ्तरों से कई अहम फाइलें और दस्तावेज गायब मिले। टीम ने अलग-अलग विभागों से जुटाए दस्तावेजों, सैटेलाइट डेटा और आईबीएम रिपोर्ट के जरिए गड़बड़ी को साबित किया।

जांच दल ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभी सिर्फ माइनिंग प्लान और पर्यावरणीय स्वीकृति की सीमाओं से बाहर हुए खनन की जांच हुई है। वन क्षेत्र और अन्य अवैध खनन की जांच अगले चरण में होगी।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले (प्रफुल्ल सामंता बनाम भारत सरकार) के बाद मध्यप्रदेश में खदानों की सैटेलाइट मैपिंग शुरू की गई है। इससे अन्य जिलों में अवैध माइनिंग की परतें खुल सकती हैं। बताया जाता है कि राजस्व वसूली की प्रक्रिया जबलपुर कलेक्टर के स्तर पर शुरू की जा रही है। वहीं, कर चोरी से जुड़े हिस्से पर संबंधित विभाग अंतिम आंकलन के बाद कार्रवाई करेंगे।


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