पीठ ने कथित पीड़िता के बयान को 'बिल्कुल भी विश्वसनीय नहीं' कहा। पीठ ने कहा, 'एक ही बयान को एक आरोप के लिए खारिज और दूसरे आरोप के लिए स्वीकार नहीं किया जा सकता। कथित पीड़िता का बयान विरोधाभासों का पुलिंदा था। यदि अभियोजन पक्ष की पीड़िता का बयान पूरी तरह विश्वसनीय और संदेह से परे हो तो उसे संपूर्ण रूप से स्वीकार किया जाना चाहिए। लेकिन, यहां उसके बयान के एक हिस्से को स्वीकार कर दूसरे हिस्से को खारिज करने का तरीका अपनाया गया, जो उचित नहीं है।'
'बलात्कार के आरोप ठोस सबूत से साबित हों', रेप केस में 10 साल की सजा पाए आरोपी को सुप्रीम कोर्ट ने किया बरी
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने रेप के एक मामले में 10 साल की सजा पाए व्यक्ति को बरी करते हुए शुक्रवार को कहा कि किसी घटना की अनैतिकता मात्र, विश्वसनीय साक्ष्य के अभाव में दोषसिद्धि का आधार नहीं बन सकती। दुष्कर्म का आरोप अनुमान या न्यायाधीश के मूल्य-निर्णय के आधार पर नहीं, बल्कि ठोस सबूत से साबित होना चाहिए।
पीठ ने कथित पीड़िता के बयान को 'बिल्कुल भी विश्वसनीय नहीं' कहा। पीठ ने कहा, 'एक ही बयान को एक आरोप के लिए खारिज और दूसरे आरोप के लिए स्वीकार नहीं किया जा सकता। कथित पीड़िता का बयान विरोधाभासों का पुलिंदा था। यदि अभियोजन पक्ष की पीड़िता का बयान पूरी तरह विश्वसनीय और संदेह से परे हो तो उसे संपूर्ण रूप से स्वीकार किया जाना चाहिए। लेकिन, यहां उसके बयान के एक हिस्से को स्वीकार कर दूसरे हिस्से को खारिज करने का तरीका अपनाया गया, जो उचित नहीं है।'
पीठ ने कथित पीड़िता के बयान को 'बिल्कुल भी विश्वसनीय नहीं' कहा। पीठ ने कहा, 'एक ही बयान को एक आरोप के लिए खारिज और दूसरे आरोप के लिए स्वीकार नहीं किया जा सकता। कथित पीड़िता का बयान विरोधाभासों का पुलिंदा था। यदि अभियोजन पक्ष की पीड़िता का बयान पूरी तरह विश्वसनीय और संदेह से परे हो तो उसे संपूर्ण रूप से स्वीकार किया जाना चाहिए। लेकिन, यहां उसके बयान के एक हिस्से को स्वीकार कर दूसरे हिस्से को खारिज करने का तरीका अपनाया गया, जो उचित नहीं है।'
