22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा होने जा रही है। इसमें केवल 16 दिन बचे हैं। राम मंदिर आंदोलन के महंत और पूर्व सांसद डॉक्टर राम विलास दास वेदांती इस आंदोलन में 25 बार जेल गए हैं। लाठी खाने और जेल जाने के बाद भी उन्होंने कभी राम मंदिर आंदोलन से दूरी नहीं बनाई।
सवाल : रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में सोनिया गांधी और ममता बनर्जी को भी आमंत्रित किया गया है।
जवाब : सोनिया गांधी, ममता बनर्जी को देश के हिंदुओं नहीं, मुस्लिमों के वोट की चिंता है। इसलिए मुझे पता कि आमंत्रण के बाद भी ये लोग 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में अयोध्या नहीं आएंगे। हमारा काम था उनको सम्मान देना। आमंत्रित करना। वह जिम्मेदारी हमारे लोग निभा रहे हैं। राम तो सबके हैं, पर जिन लोगों ने राम का काल्पनिक बता रखा हो, वह इस समारोह कैसे आ सकते हैं?
सवाल : प्राण-प्रतिष्ठा के बाद रामलला अपनी जन्मभूमि पर 500 साल बाद विराजेंगे?
जवाब : पीएम नरेंद्र मोदी के हाथों जब 22 जनवरी को रामलला स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान होंगे, तो वह दृश्य देखने योग्य होगा। सम्पूर्ण विश्व के हिंदुओं के हृदय को शांति प्राप्त होगी। हमको इस बेहद प्रसन्नता होगी, जब रामलला अपनी जन्मभूमि पर 500 साल बाद बने भव्य मंदिर में विराजमान होंगे।
इससे बड़ा सौभाग्य हमारे जीवन का और कुछ नहीं हो सकता है। हमने कभी नहीं कहा कि वहां मस्जिद थी। वहां मंदिर था, मंदिर है और रहेगा। जब 1992 में राम मंदिर आंदोलन में ढांचा गिर रहा था, तो हमने यह नारा दिया था कि राम नाम सत्य है, रामलला का ढांचा ध्वस्त है।
सवाल : आडवाणी के अयोध्या आने को लेकर आप से भाजपा या राम मंदिर ट्रस्ट ने बात की?
जवाब : राम मंदिर आंदोलन में देश का कोई ऐसा प्रांत नहीं जहां मैं नहीं गया। इस आंदोलन में देश का सबसे ज्यादा दौरा हमने किया है। रामलला का मंदिर देश का सबसे बड़ा, ऊंचा और भव्य मंदिर है। हमने रामलला के लिए 7 साल की आयु में घर छोड़ कर अयोध्या वास किया। आडवाणी जी प्राण प्रतिष्ठा पर अयोध्या आएं, तो बहुत अच्छा होगा। पर इस संबंध में आगे संगठन भाजपा और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट जो निर्णय लेगा, हम उसके साथ हैं।
सवाल : 6 दिसंबर, 1992 को ढांचा टूटते समय आप वहां मौजूद थे। CBI ने आप को आरोपी भी बनाया था?
जवाब : 6 दिसंबर, 1992 सम्पूर्ण हिंदुओं के हृदय में हैं। सम्पूर्ण हिंदू समाज चाहता था कि जब तक वहां खंडहर रहेगा, तब तक भव्य मंदिर नहीं बन सकता था। इसलिए 6 दिसंबर को हम लोगों ने रामजन्मभूमि के उस खंडहर को तोड़ा, जहां रामलला विराजमान थे।
हमारे नेता अशोक सिंघल और पूज्य महंत अवैद्यनाथ ने कहा था कि जब तक वह ढांचा रहेगा। मंदिर का निर्माण नहीं हो सकता है। वहां मस्जिद नहीं मंदिर का चिन्ह था। राजा विक्रमादित्य ने 84 कसौटी के खंभे बनाए थे, जिसमें बाबर ने सभी को तुड़वा दिया, जबकि 14 कसौटी के खंभे बचे हुए थे।
इसमें हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां बनी हुई थीं। खंभों पर दुर्गा, हनुमान जी, ओम और स्वास्तिक के चिन्ह बने हुए थे। मुझसे बहुत कहा कि उस ढांचे को विवादित कहिए, पर मैंने ऐसा कभी नहीं कहा।
सवाल : राम मंदिर आंदोलन में आप किसका ज्यादा योगदान मानते हैं?
जवाब : राम मंदिर आंदोलन में विहिप अध्यक्ष अशोक सिंहल, आचार्य गिरिराज किशोर और संतों में महंत अवैद्यनाथ इन तीनों के प्रति अपार श्रद्धा है। 2003 महंत रामचंद्र दास परमहंस के अंतिम संस्कार में जब पीएम अटल बिहारी बाजपेई आए, तो उन्होंने कहा था कि मैं जलती चिता के बीच बताना चाहता हूं कि एक दिन भाजपा का एक ऐसा नेता आएगा, जो भव्य राम मंदिर का निर्माण कराएगा।
पीएम मोदी जैसा नेता देश को नहीं मिला
डॉक्टर वेदांती आगे कहते हैं कि पीएम मोदी जैसा नेता देश को अब तक नहीं मिला। 5 अगस्त 2020 को जब पीएम मोदी राम मंदिर का भूमि पूजन करने आए तो उन्होंने रामलला को साष्टांग प्रणाम किया। हम सभी के बीच उन्होंने जो भाषण दिया। उसमें विश्व की सभी रामायण का जिक्र किया।
वाराणसी नगरी और भगवान शिव की कृपा से उनकी राम भक्ति निरंतर मजबूत होती दिख रही है। कांग्रेस के किसी सीएम पीएम ने राम मंदिर की ओर देखा नहीं। केवल भाजपा ने ऐसा सोचा और कर दिखाया।











