वेतन कटने के डर से हटे पीछे
चुनाव आयोग के शेड्यूल के मुताबिक चुनाव प्रक्रिया 5 दिसंबर तक चलेगी। 30 अक्टूबर को नामांकन दाखिल और 25 नवंबर को मतदान से लेकर 3 दिसंबर को होने वाली मतगणना के बाद तक का शेड्यूल फिक्स है। ऐसे में अगर कोई शिक्षक चुनाव लड़ने की अनुमति लेता है तो वह 5 दिसंबर तक अवकाश पर रहेगा। एक महीने से ज्यादा दिनों तक अवकाश लेने पर वेतन की मोटी राशि कटने के डर से कई शिक्षकों ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है।
विश्वविद्यालय एक्ट की आड़ लेकर बचना चाह रहे चुनाव ड्यूटी से
जिला निर्वाचन अधिकारी की ओर से विश्वविद्यालय के शिक्षकों की भी चुनाव प्रक्रिया के दौरान ड्यूटी लगाई गई। शिक्षक चुनाव ड्यूटी से बचना चाह रहे थे। ऐसे में उन्होंने विश्वविद्यालय एक्ट का हवाला देते हुए चुनाव लड़ने की इच्छा जता दी क्योंकि एक्ट के मुताबिक विश्वविद्यालय के शिक्षकों को चुनाव लड़ने के लिए नौकरी से त्यागपत्र देने की जरूरत नहीं पड़ती। केवल कुलपति से अनुमति लेकर चुनाव लड़ा जा सकता है। पहले भी कई शिक्षकों ने कुलपति की अनुमति लेकर चुनाव लड़ा था। ड्यूटी नहीं करने का यही तरीका 79 शिक्षकों ने अपनाया था लेकिन वेतन कटने के डर से अब अधिकतर शिक्षक चुनाव लड़ने को तैयार नहीं है।











