शहर के कई इलाकों में सुबह के समय धुंध और प्रदूषण की मोटी परत नजर आई। दृश्यता कम रही और हवा में भारीपन महसूस किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड बढ़ने, हवा की गति कम होने और प्रदूषक कणों के वातावरण में जमा होने से प्रदूषण का स्तर अचानक बढ़ा है। इसके पीछे वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और खुले में कचरा जलाना प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार AQI के 300 के पार जाने पर सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। बच्चों और बुजुर्गों में आंखों में जलन, खांसी, सांस फूलना और सिरदर्द जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।प्रशासन ने वायु गुणवत्ता पर निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि प्रदूषण के स्रोतों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं पर्यावरण विशेषज्ञों ने नागरिकों से निजी वाहनों का कम उपयोग करने, कचरा न जलाने और अधिक से अधिक पेड़ लगाने की अपील की है।
यदि मौसम और हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में रायपुर की हवा और अधिक जहरीली हो सकती है।











