चीन की सरकार ने शुक्रवार को कहा कि वह फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी कंपनी ऐंट के खिलाफ जांच बंद कर रही है। यह जांच 2020 से चल रही थी। इस जांच के कारण ऐंट ग्रुप को अपना आईपीओ कैंसल करना पड़ा था। इसे इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ माना जा रहा था। इस जांच से चीन को भी बड़ा नुकसान हुआ। चीन के प्राइवेट सेक्टर पर निवेशकों का भरोसा डगमगा गया। ऐंट को अपना बिजनस मॉडल पूरी तरह बदलना पड़ा। कंपनी संवेदनशील सेक्टर से हट गई। इसका वैल्यूएशन 315 अरब डॉलर से घटकर 78.5 अरब डॉलर रह गया। शनिवार को कंपनी ने इश्यू प्राइस से 75 परसेंट डिस्काउंट पर शेयर खरीदने का प्रस्ताव रखा।
अलीबाबा का हाल
जैक मा की ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा का प्रदर्शन भी अच्छा नहीं रहा। चीन की सरकार ने देश की प्रमुख इंटरनेट कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की। अलीबाबा भी उसके निशाने पर रही। ऐंट के खिलाफ जांच खत्म करने के ऐलान से अलीबाबा के शेयरों में आठ फीसदी तेजी आई और इसकी मार्केट वैल्यू 234 अरब डॉलर हो गई। 2020 में कंपनी की वैल्यूएशन एक समय 620 अरब डॉलर पहुंच गया था। इस तरह अलीबाबा और ऐंट ग्रुप को 2020 से अब तक करीब 850 अरब डॉलर की चपत लग चुकी है। यह सब हुआ जैक मा के एक बयान से। जैक मा ने 2020 में चीन के बैंकों और फाइनेंशियल रेगुलेटर्स की आलोचना की थी। इसके बाद से वह सार्वजनिक तौर पर कम ही दिखाई देते हैं।जैक मा का जन्म 10 सितंबर, 1964 को हुआ था। 1999 में जैक मा ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा (Alibaba) की स्थापना की थी। शुरू में तो चीन के लोगों ने उन्हें ठग समझा लेकिन धीरे-धीरे इंटरनेट के विस्तार से अलीबाबा का कारोबार भी बढ़ने लगा। इसके बाद मा ने Taobao Marketplace, Alipay, Ali Mama और Lynx की स्थापना की। सितंबर 2014 में अलीबाबा अमेरिका में 25 अरब डॉलर का आईपीओ लाई और दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों की जमात में शामिल हो गई। मार्च 2020 में वह मुकेश अंबानी को पछाड़कर एशिया के सबसे बड़े रईस बन गए थे। लेकिन उसी साल अक्टूबर में उनका एक बयान उनके लिए गले की हड्डी बन गया।











