भोपाल, 17/02/2026 / S. V. पॉलिटेक्निक, भोपाल के वार्षिकोत्सव “शंखनाद–2026” के अंतर्गत आयोजित सांस्कृतिक मंचीय कार्यक्रमों ने पूरे परिसर को उत्साह, ऊर्जा और क्रिएटिविटी से भर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रिंसिपल के. वी. राव द्वारा पारंपरिक दीप प्रज्वलन से हुई, जिसके साथ ही पूरे आयोजन का शुभारंभ एक सकारात्मक और प्रेरणादायक माहौल में हुआ। इसके पश्चात राष्ट्रगान और गणेश वंदना की मनमोहक प्रस्तुति ने वातावरण को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की। स्वागत समारोह में महाविद्यालय के गणमान्य अतिथियों का अभिनंदन किया गया, जिसके बाद छात्र परिषद अध्यक्ष संजना सोनी सहित विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए। उनके उद्बोधन में छात्रों की प्रतिभा, नवाचार और भविष्य की संभावनाओं पर विशेष जोर देखने को मिला। इसके बाद रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का शंखनाद हुआ। सोलो डांस से लेकर ग्रुप परफ़ॉर्मन्स तक, प्रियांशी, प्रज्ञा ग्रुप और दर्शन पाण्डेय जैसे प्रतिभागियों ने मंच पर एनर्जी का जबरदस्त प्रदर्शन किया। गीत “रघुकुल रीत सदा चली आई” पर प्रियांशी के सोलो डांस ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। प्रज्ञा और ग्रुप ने साउथ इण्डियन सॉंग टम टम (Tum Tum) पर ग्रुप डांस प्रस्तुत किया। हरफनमौला दर्शन पाण्डेय ने सांग - बिजली भी गिरवानी है” पर सोलो डांस प्रस्तुत किया। स्वाति और शैलेंद्र की सिंगिंग परफ़ॉर्मन्सेज ने ऑडियंस को पूरी तरह बांधे रखा। स्वाति ने “मेरी चुनर में पड़ गया दाग” गाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। शैलेंद्र ने “मैं कोई ऐसा गीत गाऊ” गाना गाया। कजरा मोहब्बत वाला जैसे एवरग्रीन गीतों पर ग्रुप डांस और “मन मेरा” जैसी रूहानी सुकून भरी सिंगिंग ने माहौल को म्यूज़िकल बना दिया। साथ ही नुक्कड़ नाटक ने सामाजिक संदेश के साथ दर्शकों को सोचने पर मजबूर किया। “अंबर सरिया”और “साथिया तूने क्या किया” जैसे मेलोडियस साँग्स के साथ-साथ एनर्जेटिक डांस परफ़ॉर्मन्स ने कार्यक्रम में वैरायटी और डेप्थ जोड़ी। ग्रुप डाँस“मरजानी”, डुएट सिंगिंग और म्यूज़िकल एक्ट ने कार्यक्रम को ग्रैंड क्लोज़र की ओर बढ़ाया। विशेष रूप से बैंड & बाँसुरी इंस्ट्रुमेंटल प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।  रैंप वॉक ने कार्यक्रम में ग्लैमर और कॉन्फिडेंस का तड़का लगाया, जहाँ प्रतिभागियों ने अपनी पर्सनालिटी और स्टाईल का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
अंत में डॉ आशीष उपाध्याय द्वारा वोट ऑफ़ थैंक्स के साथ इस भव्य सांस्कृतिक संध्या का समापन हुआ, जिसमें सभी प्रतिभागियों, आयोजकों और दर्शकों के योगदान की सराहना की गई। “शंखनाद– 2026” की यह सांस्कृतिक संध्या न केवल प्रतिभाओं का मंच बनी, बल्कि यह साबित कर गई कि हमारे छात्र सिर्फ तकनीकी रूप से ही नहीं, बल्कि कला और संस्कृति में भी इक्वली ब्रिलियंट हैं।











