इस मामले की जानकारी के अनुसार दिल्ली के महावीर एन्कलेव निवासी कमल सोमानी करीब 50 लाख रुपये के कर्ज में डूबा था। एक साल पहले उसने अपने नौकर अंशुल के नाम टाटा एआईए से 50 लाख रुपये का बीमा कराया और खुद को नॉमिनी बनाया। जब अंशुल घर चला गया, तब कमल के दिमाग में खतरनाक योजना बनाई।
बिना सत्यापन नहीं होगा अंतिम संस्कार:
वहीं इस घटना के संबंध में जिलाधिकारी अभिषेक पांडे ने कहा कि ऐसी घटना दोबारा ना हो, इसलिए अब बिना सत्यापन किसी भी शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। दरअसल कर्ज से निकलने की चाहत में उसने एक साल पहले अपनी दुकान में काम कर चुके नीरज के भाई अंशुल के आधार-पैन कार्ड का दुरुपयोग कर टाटा AIG में 50 लाख का जीवन बीमा करवा लिया था। किस्तें भी खुद भरता रहा ताकि कोई शक न हो।योजना के मुताबिक कमल ने अपने दोस्त आशीष खुराना के साथ मिलकर अंशुल से मिलता-जुलता प्लास्टिक का डमी पुतला तैयार करवाया। दोनों उसे कफन में लपेटकर कार से ब्रजघाट श्मशान घाट लाए और जल्दी-जल्दी चिता तैयार कराने लगे। मकसद था – नकली शव का दाह संस्कार कराकर प्रमाण-पत्र लेना और फिर बीमा कंपनी से 50 लाख का क्लेम हड़पना।
वहीं इस घटना के संबंध में जिलाधिकारी अभिषेक पांडे ने कहा कि ऐसी घटना दोबारा ना हो, इसलिए अब बिना सत्यापन किसी भी शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। दरअसल कर्ज से निकलने की चाहत में उसने एक साल पहले अपनी दुकान में काम कर चुके नीरज के भाई अंशुल के आधार-पैन कार्ड का दुरुपयोग कर टाटा AIG में 50 लाख का जीवन बीमा करवा लिया था। किस्तें भी खुद भरता रहा ताकि कोई शक न हो।योजना के मुताबिक कमल ने अपने दोस्त आशीष खुराना के साथ मिलकर अंशुल से मिलता-जुलता प्लास्टिक का डमी पुतला तैयार करवाया। दोनों उसे कफन में लपेटकर कार से ब्रजघाट श्मशान घाट लाए और जल्दी-जल्दी चिता तैयार कराने लगे। मकसद था – नकली शव का दाह संस्कार कराकर प्रमाण-पत्र लेना और फिर बीमा कंपनी से 50 लाख का क्लेम हड़पना।
चिता पर “शव” रखते ही वहां मौजूद लोगों को कुछ गड़बड़ लगा। कफन हटाकर देखा तो प्लास्टिक का पुतला था। हंगामा मच गया। दोनों युवक भागने की फिराक में थे, लेकिन लोगों ने घेर लिया। सूचना मिलते ही गढ़मुक्तेश्वर इंस्पेक्टर मनोज कुमार बालियान पुलिस बल के साथ पहुंचे और कमल सोमानी और आशीष खुराना को हिरासत में ले लिया।











