"जंग के घावों पर भ्रमण का मरहम", इसी विचार के साथ 1949 में शुरू हुआ वैश्विक शांति का सफर आज एक नए पड़ाव पर है। द्वितीय विश्वयुद्ध की विभीषिका के बाद बॉब लुइटवेइलर द्वारा स्थापित और संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध संस्था 'सरवास' (जिसका अर्थ है, 'हम शांति को बढ़ावा देते हैं') ने नासिक में आयोजित अपने वार्षिक सम्मेलन में नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा की है।
इस बार की टीम में मध्यप्रदेश की सक्रिय भागीदारी ने विशेष ध्यान खींचा है, जो प्रदेश के प्रबुद्ध जनों की वैश्विक शांति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
*नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी*: नेतृत्व का नया चेहरा, आगामी तीन वर्षों के लिए देश के विभिन्न शहरों से चुने गए प्रतिनिधियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं। बेंगलुरु के डॉ. सी.एन.एन. राजू को संस्था का नया 'प्रेसिडेंट' नियुक्त किया गया है, जबकि नासिक के नितिन वानखेड़े 'नेशनल सेक्रेटरी' की भूमिका निभाएंगे।
इंदौर के मनीष जैन को 'डिप्टी नेशनल सेक्रेटरी' और प्रो. वंदना तारे को 'न्यूज़ लेटर एडिटर' के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। इसके साथ ही, नासिक के प्रदीप कोरड़े को 'कोषाध्यक्ष', पुणे की रुपाली मेमाने को 'होस्ट लिस्ट कोऑर्डिनेटर' और विशाखापत्तनम के प्रो. के.के.के. चांद को 'पीस सेक्रेटरी' मनोनीत किया गया है।
*'भ्रमण से शांति' का मूल मंत्र*
गांधीवादी विचारक भाईजी श्री हरिवल्लभ पारिख द्वारा 1951 में भारत में रोपा गया यह बीज आज एक वटवृक्ष बन चुका है। 'सरवास' के सदस्य मेहमान और मेजबान के रूप में एक-दूसरे के घरों में ठहरते हैं। यह 'होम स्टे' केवल पर्यटन नहीं, बल्कि एक-दूसरे की संस्कृति और संवेदनाओं को समझने का जरिया है।
प्रदेश के अग्रणी इंजीनियरिंग कॉलेज एसजीएसआईटीएस की प्रो. अंजना जैन (निवृत्तमान डिप्टी नेशनल सेक्रेटरी) ने पिछली बैठक का लेखा-जोखा (मिनट्स) प्रस्तुत किया, जिसे सर्वसम्मति से सराहा गया।
सम्मेलन में जहाँ 80 वर्ष पार कर चुके बुजुर्गों का अनुभव था, वहीं युवाओं का जोश भी दिखा। दिल्ली, विशाखापत्तनम, जमशेदपुर से लेकर बंगलौर, पुणे, मंगलौर और हुबली तक के प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए।
श्रीमती अमृता करकरे द्वारा संपादित 'सरवास न्यूज़लेटर' का लोकार्पण मुख्य अतिथि डॉ. संजीव सोनवाने (कुलगुरु, यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र मुक्त विश्वविश्वद्यालय) द्वारा किया गया।
> "नियमित यात्राएं और अनजान लोगों को पारिवारिक मित्र बनाना ही वैश्विक शांति का सबसे प्रभावशाली और सरल माध्यम है।"
> — प्रो. प्रकाश व्यवहारे, निवृत्तमान अध्यक्ष
संस्था के वैश्विक अध्यक्ष राधा बी. राधाकृष्णन और भाईजी के सहयोगी रहे पूर्व नेशनल सेक्रेटरी अभय शाहा ने विश्वास जताया है कि नई टीम 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना को और मजबूती से आगे बढ़ाएगी।











