गोसल को गिरफ्तारी के कुछ देर बाद पील रीजनल पुलिस (पीआरपी) ने शर्तों के तहत रिहा कर दिया। गोसल को ब्रैम्पटन में ओंटारियो कोर्ट ऑफ जस्टिस के सामने पेश होना होगा। टोरंटो स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, गोसल प्रतिबंधित गुट सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) का कॉर्डिनेटर है। उसे कनाडा में खालिस्तान जनमत संग्रह कराने वाले सबसे प्रमुख व्यक्ति माना जाता हैं।
गोसल के नाम की चर्चा क्यों?
कनाडाई पुलिस ने कहा था कि गोसल भी उन 13 लोगों में से था, जो खालिस्तान समर्थक होने की वजह से आपराधिक हिंसा का निशाना बना। पुलिस ने उसको चेताया भी था। ब्रैम्पटन में हिंदू मंदिर में हिंसा के मामले में भी एसएफजे ने दावा किया है कि प्रदर्शन के दौरान गोसल को निशाना बनाया गया, जो उस समय एक कांसुलर शिविर की मेजबानी कर रहा था। इस दौरान टोरंटो स्थित वाणिज्य दूतावास के भारतीय अधिकारी परिसर में मौजूद थे।
गोसल को अपने आक्रामक बयानों के लिए भी जाना जाता है। पिछले महीने गोसल ने कहा था कि खालिस्तान बनाने के लिए मरना भी पड़ा तो वह पीछे नहीं हटेगा। गोसल ने कहा था कि मौत उसे डराती नहीं है। गोसले की पन्नू के साथ तस्वीरें आती रही हैं तो वह अक्सर खालिस्तानी झंडे के साथ भी दिखता रहा है। भारत विरोधी बयान देना उसकी आदत का हिस्सा है। पन्नू और गोसल दोनों भारत के लिए जहर उगलते रहे हैं।











