उन्होंने कहा 'ऐसे कई देश हैं जिनमें जाहिर तौर पर हमारा पड़ोसी देश भी शामिल है जिनके पास सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता का दावा करने के लिए भी कोई योग्यता नहीं है।' पाकिस्तानी राजदूत ने कहा कि भारत, जर्मनी, जापान और ब्राजील के G4 समूह की ओर से नई स्थायी सीटों की मांग ही वह वजह है जिसने दो दशकों से सुधारों को रोक रखा है। उन्होंने कहा 'यह इस पूरी प्रक्रिया से एक खास विशेषाधिकार मांगने जैसा है। हमारा मानना है कि यह एक अनुचित मांग है और न सिर्फ अनुचित बल्कि यह अव्यावहारिक भी है।'
UNSC की रेस में भारत के नाम से क्यों डर रहा पाकिस्तान?
पाकिस्तान को डर है कि अगर भारत यूएनएससी का सदस्य बन जाता है तो भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाना मुश्किल हो जाएगा। इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान के कई काम को भारत रोकेगा। जैसे सूडान में यूएन की आपत्तियों के बावजूद पाकिस्तान ने हथियार सप्लाई की है। पाकिस्तानी दूत ने कहा कि गाजा और यूक्रेन जैसे संकटों पर परिषद का बार-बार ठप पड़ जाना पांच स्थायी सदस्यों के रुख और उनके वीटो के इस्तेमाल का नतीजा है।उन्होंने कहा 'अगर पांच स्थायी सदस्यों के रुख की वजह से परिषद अक्सर गतिरोध का शिकार हो जाती है तो आप सोच सकते हैं कि अगर मौजूदा पांच सदस्यों के बजाय आठ, नौ या 10 स्थायी सदस्य हों तो यह और भी ज्यादा ठप हो जाएगी।' अहमद ने कहा कि और वीटो रखने वाले सदस्य जोड़ने का मतलब है 'और ज्यादा समस्याएं।'
