एक समय की बात है। एक नौजवान बेटा और उसका बूढ़ा बाप घर से बाहर टहलने निकलते है। वे टहलते हुए बातें करते है और मौसम का आनन्द उठाते है। बेटा अपने बाप की बहुत इज्जत करता है। तभी बेटे को वहाँ एक रेस्टोरेंट दिखता है तो वह पिता से कहता है कि चलिए पिताजी हम रेस्टोरेंट चलकर खाना खाते है। दोनों रेस्टोरेंट जाते है और खाना आर्डर करते है। पिता और बेटा खाना खाते हुए बातें करते हैं। पिता कहता है कि बेटा क्या तुम्हें पता है, जब तुम छोटे थे तो मैं, तुम और तुम्हारी माँ यहाँ अक्सर खाना खाने आते थे। बेटा कहता है कि पिताजी मुझे याद है, इसीलिए तो मैं आज आपको यहाँ लेकर आया हूँ। पुरानी यादें ताजा हो जाएगी। पिता अपने बेटे की ऐसी बातें सुनकर मन ही मन बहुत खुश हुआ। दोनों खाना खाने लगे। खाना खाते समय पिता के हाथ से खाना गिर जाता है और उसके कपड़े गंदे हो गए। ये देखकर वहाँ बैठे हुए लोग हँसने लगे। लेकिन बेटे को कोई फर्क नहीं पड़ा। दोनों आराम से अपने खाने का आनंद लेते है। जब दोनों का खाना पूरा हुआ तो बेटा बड़े आदर के साथ पिता का हाथ पकड़ता है और उन्हें वाशरूम में ले जाता है तो फिर से रेस्टोरेंट के सारे लोग उन्हें देखकर हँसने लगते है। बेटे को कोई फर्क नहीं पड़ा। वाशरूम में जाकर वह पिता के कपड़ों में लगे दाग धब्बे साफ करता है और उन्हें हाथ पकड़कर बाहर लाता है। वे दोनों अपना बिल मैनेजर को देते है और जाने लगते है। तभी मैनेजर बेटे को कहता है कि साहब आप यहाँ कुछ भूल रहे हो। बेटा कहता है कि नहीं तो मैं कुछ नहीं भूल रहा हूँ। मैनेजर कहता है कि साहब आप यहाँ इन लोगों के लिए एक सीख छोड़कर जा रहे हो कि कभी भी बूढ़े माता-पिता के लिए शर्मिंदगी महसूस नहीं करनी चाहिए और हमेशा उनका सहारा बनाना चाहिए।
सीख: अपने माता-पिता की सेवा करनी चाहिए।











