रेस्क्यू कार्य में लगी एजेंसियां स्केप टनल को सबसे सुरक्षित और सबसे अधिक तेजी से श्रमिकों तक पहुंचाने का विकल्प मान रही है। यही वजह है कि इस योजना पर लगातार फोकस किया जा रहा है। सेना की मदद से मजदूरों को निकालने की योजना तैयार की गई है। बीआरओ के पूर्व डीजी लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने स्केप टनल के निर्माण को लेकर बड़ा अपडेट दिया। उन्होंने कहा कि ऑगर मशीन के ब्लेड निकाल लिए गए हैं। खराब पाइप निकाला जा रहा है। दरअसल, शुक्रवार 24 नवंबर की रात ऑगर मशीन का ब्लेड मलबे के स्टील में फंस कर टूट गया था। इस कारण ऑगर मशीन से खुदाई का काम रोकना पड़ा। मशीन का ब्लेड के साथ पाइप भी मलबे में फंस गया था। अब इन्हें निकालने का कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा इस कार्य में सेना की मदद ली जा रही है। वर्टिकल टनल का निर्माण, मैनुअल खुदाई और मशीनों से खुदाई के विकल्पों पर भी काम किया जा रहा है। इन छह विकल्पों के जरिए 41 जानों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
बीआरओ के पूर्व डीजी का बड़ा बयान
सिल्क्यारा टनल के रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे बीआरओ के पूर्व डीजी लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह का कहना है कि स्केप टनल ही रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज गति से आगे बढ़ाने का सबसे सही तरीका है। उन्होंने कहा कि वर्टिकल ड्रिलिंग का कार्य किया जा रहा है। वर्टिकल ड्रिलिंग के साथ 200 मिलीमीटर की पाइप डाली जा रही है। अब तक 70 मीटर तक पाइप को ड्रिल करने में मदद मिली है। इसके बाद भीतर से मलबे को निकालने के बाद आगे की खुदाई की तैयारी है। वर्टिकल ड्रिलिंग की प्रक्रिया पूरी होने में चार दिनों का समय लग सकता है।
मजदूरों की सेहत का ख्याल
टनल में फंसे मजदूरों को बेहतर स्थिति में रखने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। अब तक वे मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत दिख रहे हैं। मजदूरों के खान-पान का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। मजदूरों को सत्तू के लड्डू बनाकर भेजे गए हैं। 41 पैकेट लड्डू भेजे गए हैं। इसके साथ-साथ दलिया और उबले अंडे भी भेजे गए हैं। पीएम के प्रमुख सचिव पीके मिश्रा ने सिल्क्यारा टनल कर रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा लिया। उन्हें बताया गया कि कुछ देर में मैनुअल ड्रिलिंग का कार्य शुरू किया जाएगा। पीके मिश्रा ने टनल के भीतर की स्थिति की भी जानकारी ली।











