चौंकाने वाले सवाल करते भी दिखे
नए नवेले शिक्षकों से बातचीत के क्रम में केके पाठक ने महिला टीचरों से जानकारी मांगी कि कौन-कौन टू-व्हीलर चलती हैं और कौन फोर-व्हीलर। हालांकि जवाब में अधिकांश शिक्षिकाओं का उत्तर नकारात्मक ही रहा कि वे ड्राइव करना नहीं जानती हैं। ये सुनते ही केके पाठक ने तत्काल अपने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी को टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर चलाने की ट्रेनिंग दिलाने की व्यवस्था की जाए। इसके लिए अलग से फंड को मंजूरी दे दी जाएगी। शीघ्र ही सभी शिक्षिकाओं को गाड़ी चलाने की ट्रेनिंग देने की व्यवस्था की जाए। वे ड्राइविंग सिख जाएंगी तो स्कूल आने-जाने में उन्हें किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा और वे आत्मनिर्भर भी हो जाएंगी।घर की व्यवस्था को लेकर भी सलाह
हालांकि, पहले शिक्षा विभाग की ओर से कहा गया था कि पंचायत में उनके रहने की व्यवस्था की जाएगी। मगर, इधर ये सलाह दी गई कि वो अपने स्कूल के तीन से चार किलोमीटर के दायरे में ही अपने लिए घर ले लें। तभी वे स्कूल सही समय पर आ पाएंगे और पढ़ाने में भी सुविधा होगी।कंप्यूटर शिक्षा के बारे में भी पूछा
केके पाठक ने ट्रेनिंग सेंटर पर पूछा कि आप में से किन शिक्षकों को कंप्यूटर का उपयोग करने की जानकारी हैं। मगर, इस प्रश्न का भी जवाब नहीं मिला। दरअसल, केके पाठक सरकारी स्कूल के शिक्षकों के प्रति जो धारणा बनी हुई है, उस बिंब को तोड़ना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि निजी स्कूल की तरह ही सरकारी शिक्षक स्मार्ट टीचर बनें। जिन्हें नई तकनीक की भी जानकारी हो। बहरहाल, ये प्रयास है। सफलता की कुंजी शिक्षकों पर निर्भर करता है कि वे अपने को कितना बदलना चाहते हैं।











