बॉम्बे मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने भैंस के दूध की थोक कीमत 93 रुपये से बढ़ाकर 102 रुपये प्रति लीटर कर दी है। नई दर 1 सितंबर 2026 से लागू होगी और 28 फरवरी 2027 तक प्रभावी रहेगी। थोक कीमत बढ़ने के बाद खुदरा बाजार में भी दूध महंगा होने की उम्मीद है।
घरेलू बजट पर बोझ
दूध की कीमत बढ़ने की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और इंस्टाग्राम पर लोगों ने अलग-अलग अंदाज में प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने इसे घरेलू बजट पर एक और बोझ बताया, तो कई यूजर्स ने महंगाई को लेकर मजेदार टिप्पणियां कीं।एक इंस्टाग्राम यूजर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर चीनी और दूध दोनों महंगे होते गए तो घर पर बनने वाली साधारण चाय भी लग्जरी जैसी महसूस होने लगेगी। इसकी कीमत ताज होटल में मिलने वाली चाय जितनी होगी। एक अन्य यूजर ने व्यंग्य करते हुए पूछा कि क्या दूध भी अब होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आ रहा है?
इथेनॉल से कितना कनेक्शन?
बॉम्बे मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने कीमत बढ़ाने के पीछे पशु आहार और चारे की बढ़ती लागत को मुख्य वजह बताया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष सीके सिंह के मुताबिक, अनाज, तुअर चुनी, चना चुनी और मक्का जैसे कई पशु आहार की कीमतों में 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा घास और चारे की कीमत भी बढ़ी है।कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मक्का जैसे पशु आहार की कीमत में बढ़ोतरी इनकी कम उपलब्धता के कारण हुई है। दरअसल, इथेनॉल बनाने में गन्ने और चावल के साथ मक्का का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में बाजार में उनकी उपलब्धता कम हो गई है, जिससे कीमत में उछाल आया है। इसका असर अंडाें पर भी पड़ गया है। पिछले एक साल में अंडों की कीमतें करीब 35-40% बढ़ी हैं।
