'सेफ नहीं, लेकिन सड़क पर जाना कैसे छोड़ दें?' गुडगांव की घटना के बाद महिला बाइकर्स और साइकलिस्ट ने बताए अपने अनुभव

'सेफ नहीं, लेकिन सड़क पर जाना कैसे छोड़ दें?' गुडगांव की घटना के बाद महिला बाइकर्स और साइकलिस्ट ने बताए अपने अनुभव
नई दिल्ली: गुड़गांव में महिला बाइकर के साथ हुई घटना ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली-एनसीआर में बाइक और साइकल चलाने वाली महिलाओं का कहना है कि उन्हें सड़क पर हमेशा दूसरे लोगों के व्यवहार से जूझना पड़ता है। अकेले बाइक चलाने करने वाली राइडर्स का कहना है कि पहचान जाहिर होने के बाद कई बार लोग उन्हें परेशान करने लगते हैं। ऐसी घटनाएं आम हैं, लेकिन इसके डर से सड़क पर निकलना बंद नहीं कर सकते। उनका कहना है कि सड़क पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए निगरानी, कार्रवाई और लोगों में संवेदनशीलता जरूरी है।


विडियो सामने आते ही पुलिस और पीड़िता से बात कर जानकारी ली। आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।
ऊषा प्रियदर्शी, चेयरपर्सन हरियाणा राज्य महिला आयोग

दिल्ली से कश्मीर तक राइड, फिर भी अनसेफ

दिल्ली से कश्मीर तक बाइक से यात्रा कर चुकीं सहर हाशमी इस समय कई राज्यों की बाइक राइड 'बियॉन्ड द होराइजन' पर हैं। उनका कहना है कि दिल्ली से लेकर दूसरे राज्यों तक स्थिति एक जैसी है। सेफ नहीं लगता। लेकिन सड़कों पर तो निकलना ही होगा। एक बार राइड के दौरान कार में बैठे लड़कों ने उन्हें काफी परेशान किया है। हैरानी की बात यह थी कि उस गाड़ी में महिलाएं भी मौजूद थीं।


आरोपी को राजस्थान से गिरफ्तार किया है। वह जिम के अलावा प्रॉपर्टी का काम भी करता है। लवलीश की भूमिका की जांच जारी है।
संदीप कुमार, डीसीपी ईस्ट गुड़गांव

जैसे ही हेलमेट उतारते हैं, लोग करने लगते हैं परेशान : सीमा

बाइकर सीमा डोरा के मुताबिक ग्रुप में राइड करना अपेक्षाकृत सुरक्षित है, क्योंकि ग्रुप में पुरुष राइडर्स भी होते हैं। लेकिन अकेले राइड करते समय स्थिति बिल्कुल ही बदल जाती है। जब तक लोगों को यह पता नहीं होता कि बाइक कौन चला रहा है, तब तक कुछ नहीं होता। जैसे ही हमारी पहचान जाहिर होती है या हेलमेट उतारते हैं, उसके बाद कार सवार और बाइक वाले परेशान करने लगते हैं। मेरे साथ कई बार ऐसा हुआ है। सीमा के मुताबिक राइड के दौरान कई बार गिराने की कोशिश, डिवाइडर के बेहद करीब जाने पर मजबूर करना या इस तरह ओवरटेक करना आम है, जिससे बाइक का संतुलन बिगड़ सकता है।

साइकल से सटकर निकलती हैं गाड़ियां, बिगड़ जाता है संतुलन : नेहा

साइकलिस्ट नेहा रायजादा का कहना है कि रोड पर साइकलिस्ट के लिए सेफ्टी नहीं है। महिला साइकलिस्ट को देखकर गाड़ी चला रहे कई लोग काफी करीब से निकलते हैं। कई बार बाइक और गाड़ियां सटकर निकलती हैं, जिससे साइकल डिसबैलेंस हो जाती है। ऐसे कई वाकये होते रहते हैं। नेहा का कहना है कि हर जगह कैमरे भी नहीं लगे हैं। जहां निगरानी नहीं होती, वहां ऐसी घटनाओं का खतरा ज्यादा रहता है। लोगों में कार्रवाई का खौफ नहीं है। हालांकि, इन घटनाओं के कारण सड़क पर निकलना छोड़ा नहीं जा सकता।

2-3 सेकेंड का फर्क होने पर जा सकती थी जान: सिया

पॉश एरिया गोल्फ कोर्स रोड पर रविवार सुबह लेडी बाइक राइडर को तेज रफ्तार कार से टक्कर मारने के मामले में पुलिस की जांच जारी है। इस बीच मंगलवार सुबह बाइक राइडर शिवानी उर्फ सिया चौहान का एक विडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें उन्होंने कार चालक के दावों और सफाई को सिरे से खारिज कर दिया। सिया ने कहा कि राइडिंग शूज़, ग्लव्स और सेफ्टी गियर्स पहने होने की वजह से उनकी जान बच गई और गंभीर फ्रैक्चर नहीं हुआ, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। सिया ने दर्द बयां करते हुए कहा कि दो से तीन सेकंड का फर्क होने पर उनकी जान भी जा सकती थी। कार की टक्कर के बाद वह सड़क पर दूर तक घिसटती चली गईं। सिया का कहना है कि आरोपी चालक खुद को बेकसूर बताने का नाटक कर रहा है।

हादसे के बाद दोस्तों ने पहुंचाया था घर

शिवानी ने आरोपी के उस दावे पर सवाल उठाया, जिसमें उसने कहा था कि उसे पता नहीं था कि बाइक महिला चला रही है। पीड़ित ने कहा, मेरी छोटी और लंबे बाल साफ दिख रहे थे। आरोपी ने जानबूझकर पीछा किया और रोकने के लिए इशारे किए। उन्होंने आरोपी की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसे इतना ही दुख था तो हादसे के बाद मौके पर रुककर मदद करता। बताया जा रहा है कि सिया करीब 7-8 माह से बाइक चला रही है।

पिता बोले- यह हादसा नहीं, हत्या की कोशिश

बाइकर शिवानी चौहान उर्फ सिया को कार से टक्कर मारने के मामले में पीड़ित परिवार खुलकर सामने आ गया है। पिता रोशन चौहान सिया व परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मंगलवार को गुड़गांव पहुंचे और सेक्टर-56 पुलिस से संपर्क किया। सिया ने कोर्ट में बयान दर्ज कराए। रोशन चौहान ने कहा कि वह पूरी कानूनी लड़ाई लड़ेंगे, ताकि सिया को इंसाफ मिल सके। दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाकर रहेंगे। रोशन चौहान का कहना है कि यह कोई सामान्य सड़क हादसा नहीं है, बल्कि उनकी बेटी को जान से मारने की कोशिश थी।
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