नई दिल्ली: सिविल लाइंस इलाके में एक 50 साल की महिला से 200 करोड़ की रंगदारी मांगने की खबर एनबीटी छपने से हड़कंप मच गया है। इससे पहले अधिकतम 10 करोड़ रुपये की डिमांड गैंगस्टर्स ने की है। ऐसे में गैंगस्टर गोल्डी बराड़ के नाम से इस एक्सटॉर्शन कॉल पर खुद पुलिस ही भरोसा नहीं कर पा रही है। सवाल ये है कि विदेश में बैठा गैंगस्टर कैसे करता है टारगेट की पहचान ? पीड़ित की सारी जानकारी कैसे उस तक पहुंचती है? टारगेट को डराने के लिए फायरिंग कैसे करवाई जाती है?रकम की वसूली कैसे करते हैं?
एक पुलिस अफसर बताते हैं कि दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हर गिरोह का मेंबर विदेश पहुंच चुका है। लोकल बदमाश, बिल्डर, प्रॉपर्टी डीलर, सट्टा ऑपरेटर, हवाला कारोबारी और अन्य बिजनेस से जुड़े लोग इनसे जुड़े हैं। कुछ पुलिस वाले और कथित वकील भी गैंग्स के करीब होते हैं। इन्हीं मददगारों के जरिए विदेश में बैठे गैंगस्टर को इनपुट भेजे जाते हैं। अधिकतर सट्टा ऑपरेटर, फर्जी कॉल सेंटर संचालक, नशा तस्कर, उद्योगपति, बिल्डर, जूलर, प्रॉपर्टी डीलर, कार डीलर और ट्रांसपोर्टर टारगेट पर होते हैं, जिनकी पुलिस केहवाला-USDT से विदेश जाती है रकम
पुलिस अफसर बताते है कि रंगदारी गैंगस्टर्स का सबसे बड़ा जरिया है। देश की जेलों में बंद हों या विदेश भागे गैंगस्टर्स, इनका महीने का खर्च लाखों रुपयो में है। जेलों में फैसिलिटी और फोन चाहिए होते हैं। विदेश में रहने और खाने का खर्चा है। गुर्गों, हथियार और लॉजिस्टिक भी जुटाना होता है। फिर बची रकम प्रॉपर्टी, होटल, बार- रेस्टोरेंट, बिट कॉइन, गोल्ड बिजनेस, अवैध शराब, सट्टा और हवाला समेत कई धंधों में लगाते हैं। इन धंधों को संभालने वाले गुर्गे हवाला या USDT से विदेश रकम भेजते है।
विवाद कनेक्शन की भी तलाश
पारिवारिक विवाद के एंगल से भी की जांच पुलिस के मुताबिक, सिविल लाइंस की शिकायतकर्ता महिला ने पूछताछ के दौरान अलग-अलग रकम बताई है। शुरुआती जांच में महिला के ससुर की मौत के बाद परिवार में विवाद का भी पता चला है। इसलिए धमकी और विवाद के कनेक्शन को भी खंगाला जा रहा है। कॉल करने वाले को शिकायतकर्ता और उसकी फैमिली की जानकारी देने वाले सोर्स का भी पता लगाया जा रहा है। कॉल इंटरनेट बेस्ड थी या किसी विदेशी मोबाइल नेटवर्क से कॉल हुआ था, इसे भी चेक किया जा रहा है।पैसा नहीं मिलने पर फायरिंग
एक रिटायर्ड अधिकारी बताते हैं कि मांडवाली होने पर रकम बिचौलिये को सौंप दी जाती है। पैसा नहीं मिलने पर फायरिंग कर दहशत फैलाई जाती है। जेल में और बाहर बैठे गैंग मेंबरों के जरिए बदमाशों को हथियार -रकम का झांसा देकर या विदेश बुलाने का वादा कर फायरिंग कराते हैं। अफसर बताते हैं कि ये मददगार टारगेट के बिजनेस, परिवार, हैसियत, एड्रेस और फोन नंबर मुहैया करते हैं। विदेश में बैठे गुर्गो का पंजाब, राजस्थान, हरियाणा और यूपी के गिरोहों से भी गठजोड़ है। इसलिए इनसे भी कॉल करवाई जाती है।