भोपाल। कोलार सिक्सलेन के निर्माण के दौरान नियमों का पालन नहीं करने से सड़क के आसपास का एक्यूआइ 300 के पार पहुंच गया है। उड़ती धूल ने स्थानीय रहवासियों की सेहत खराब कर दी है। लोग फेफड़ों और सांस संबंधी बीमारियों की गिरफ्त में आ गए हैं। अब इसको लेकर एनजीटी ने भी सख्ती दिखाई है। निर्माण एजेंसी पीडब्ल्यूडी को निर्माणाधीन सड़क पर निरंतर पानी का छिडकाव करने के आदेश दिए हैं। साथ ही वायु गुणवत्ता की निगरानी के निर्देश दिए हैं। यदि इसमें निर्माण एजेंसी के द्वारा लापरवाही बरती जाती है, तो उसे खिलाफ मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कार्रवाई की जिम्मेदारी सौंपी है।
बता दें कि पर्यावरण कार्यकर्ता नितिन सक्सेना ने तीन नवंबर 2023 को कोलार में सिक्सलेन के कारण बढ़ते प्रदूषण को लेकर एनजीटी में याचिका लगाई थी। जिसमें बताया गया है कि कोलार में सिक्स लेन निर्माण की वजह ये यहां वायू प्रदूषण खतरनाक स्तर से भी आगे निकल गया है। यहां एयर क्वालिटी इंडेक्ट (एक्यूआई) औसतन 250 से ज्यादा दर्ज हो रहा है। जिसके बाद तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह ने भी कोलार सिक्सलेन का निरीक्षण कर प्रदूषण कम करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया था। वहीं एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की एक समिति बनाकर सड़क का निरीक्षण करने और छह सप्ताह में इसकी रिपोर्ट एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
पीसीबी ने रिपोर्ट में प्रदूषण का स्तर खतरनाक बताया
कोलार गेस्ट हाउस से कजलीखेड़ा के कालापानी तक 15.10 किलोमीटर सड़क की लागत 222 करोड़ रुपये है। एनजीटी के निर्देश के बाद पीसीबी के अधिकारियों ने 10 व 11 जनवरी 2024 को इसका निरीक्षण किया। जिसमें पाया कि गेंहूखेड़ा से कालापानी तक आठ किलोमीटर सड़क का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। जबकि डीमार्ट से सर्वधर्म व चूनाभट्टी से कोलार गेस्ट हाउस तक करीब सात किलोमीटर का निर्माण अधूरा है। इसी क्षेत्र में सबसे अधिक प्रदूषण हो रहा है। हालांकि पीडब्ल्यूडी का तर्क है कि सुबह और शाम दो बार सड़क पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है। लेकिन पीसीबी के रिपोर्ट के बाद एनजीटी ने कहा है कि पानी का छिड़काव इतनी मात्रा में होना चाहिए कि धूल सूखने न पाए। तभी इसका उत्सर्जन रोका जा सकेगा। इसके लिए निरंतर पानी का छिड़काव होता रहे।
विध्वंस सामग्री से भी बढ़ रहा प्रदूषण
पीसीबी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सड़क निर्माण के दौरान इसके दोनों ओर अतिक्रमण हटाया जा रहा है। यहां के पक्के निर्माण को गिराया जा रहा है। इससे भी अत्याधिक प्रदूषण हो रहा है। वहीं ये विध्वंस सामग्री भी सड़कों के किनारे छोड़ दी गई है। जिससे प्रदूषण में और अधिक बढ़ोत्तरी हो गई है। जब सड़क का निर्माण किया जाता है, तो उसका वैकल्पिक मार्ग बनाया जाता है। लेकिन यहां ऐसा नहीं किया गया। ऐसे में जहां सड़क के लिए मिट्टी खोदने से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है, वहीं इस पर वाहनों के चलने से स्थिति और खराब हो रही है। यदि जिम्मेदार एजेंसियों द्वारा निर्देशों को पालन नहीं होता, तो पीसीबी इनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करेगा।











