पीड़ित मंजू पाठक ने बताया कि सोसायटी ने बहुत सी जमीनें नए लोगों को बेच दीं, पर पुराने सदस्यों को जमीन नहीं दी गई है। मंगलवार को यह मामला एक बार फिर जनसुनवाई में उठा। पीड़ित सदस्यों ने कलेक्टर के समक्ष आवेदन देकर मांग की है कि उपलब्ध भूमि का सत्यापन कराया जाए और जमा राशि तथा वरिष्ठता के आधार पर पात्र सदस्यों को प्लॉट अथवा रजिस्ट्री दी जाए। एडीएम सुमित पांडेय ने सीमांक का आश्वान दिया है।
2012 में जमा कराई थी अतिरिक्त राशि
सोसायटी के सदस्य अजय सक्सेना ने बताया कि 2012 में कलेक्ट्रेट स्तर पर हुई बैठक के बाद सदस्यों से अतिरिक्त राशि जमा कराई गई थी। जब सोसायटी सबको घर नहीं दिला पाई तो सहकारिता विभाग ने सोसायटी को अपने अधीन ले लिया और 2016 में वहां सरकारी प्रशासक नियुक्त कर दिया।
सहकारिता विभाग के अधीन आने के बाद भी सदस्यों को जमीन नहीं मिली है। सदस्य भटक रहे हैं। कई सदस्य बुजुर्ग हो चुके हैं, कुछ की मौत भी हो गई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
बताया था- विकास कार्यों के बाद करा देंगे रजिस्ट्री
सदस्य अजय सक्सेना के मुताबिक सोसायटी ने 2011-12 में विकास शुल्क के नाम पर सदस्यों से 3.45 लाख रुपए से लेकर 4.5 लाख रुपए तक जमा कराए। सदस्यों को बताया गया कि विकास कार्यों के बाद प्लॉट की रजिस्ट्री कर दी जाएगी।
कई परिवारों ने पूरी राशि जमा कर दी, लेकिन बाद में उन्हें प्लॉट नहीं मिले। अजय सक्सेना ने कहा कि मैंने पहले सोसाइटी को 94 हजार दिए थे। 2012 में विकास के नाम पर 3 लाख 45 हजार रुपए दिए पर अभी तक जमीन नहीं मिली।
आवंटित प्लॉट दूसरे लोगों को देने के आरोप
पीड़ित सदस्य मंजू पाठक ने बताया कि जिन प्लॉटों का आवंटन पुराने सदस्यों के नाम किया गया था, उनमें से कुछ की बाद में अन्य लोगों के नाम रजिस्ट्री कर दी गई। इससे पुराने सदस्य अपने अधिकार से वंचित रह गए। पीड़ितों का कहना है कि कई बार जानकारी मांगने के बाद भी उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
पीड़ितों का आरोप है कि वर्षों पहले सदस्य बने लोगों को प्लॉट नहीं मिले, जबकि बाद में जुड़े कुछ लोगों को लाभ मिल गया। उनका कहना है कि आवंटन और रजिस्ट्री की प्रक्रिया में वरिष्ठता का पालन नहीं किया गया।
2010 से लगातार शिकायतें, समाधान नहीं
दस्तावेजों के मुताबिक सदस्य 2010 से जनसुनवाई, सीएम हेल्पलाइन, कलेक्टर कार्यालय और सहकारिता विभाग में लगातार शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। कई शिकायतों पर सुनवाई हुई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका। कुछ सदस्य दर्जनों बार आवेदन दे चुके हैं।
पीड़ितों का कहना है कि सोसायटी में करीब एक दशक से प्रशासक नियुक्त है। इसके बावजूद पात्र सदस्यों को प्लॉट आवंटन और रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। सदस्यों का आरोप है कि खाली प्लॉटों और उपलब्ध भूमि की स्थिति भी स्पष्ट नहीं की जा रही।
बुजुर्ग हो गए सदस्य, कुछ की हो चुकी मौत
पीड़ितों के अनुसार कई सदस्य अब उम्रदराज हो चुके हैं और बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की स्थिति में नहीं हैं। कुछ सदस्य अपने जीवनकाल में प्लॉट मिलने का इंतजार करते रहे और उनकी मृत्यु हो गई। इसके बावजूद उनके परिवार आज भी न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
सदस्यों का कहना है कि सोसायटी ने वर्षों में बड़ी संख्या में लोगों से रकम जमा कराई। पीड़ित अब यह भी मांग कर रहे हैं कि जमा राशि, उपलब्ध जमीन और पूर्व में किए गए आवंटनों की पूरी जांच कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
जिले में 900 से ज्यादा लोग प्रभावित
जानकारी के मुताबिक राजधानी की विभिन्न हाउसिंग सोसायटियों से जुड़े 900 से अधिक सदस्य प्लॉट और रजिस्ट्री संबंधी समस्याओं से प्रभावित हैं। करीब 941 लोग लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं।
सहकारिता विभाग से जुड़ी 285 शिकायतें सीएम हेल्पलाइन में लंबित हैं। पूर्व में 2010 और 2019 में भी कलेक्टर स्तर पर सुनवाई और कार्रवाई के प्रयास हुए थे, लेकिन बड़ी संख्या में मामलों का समाधान अब तक नहीं हो पाया है।











