एमपी की नदियों का प्रदूषण रोकने में लापरवाही : 11 माह बाद आई राज्यपाल के निर्देश पर अमल की सुध

एमपी की नदियों का प्रदूषण रोकने में लापरवाही : 11 माह बाद आई राज्यपाल के निर्देश पर अमल की सुध

प्रदेश में नदियों का प्रदूषण रोकने को लेकर सरकारी तंत्र इतना बेपरवाह है कि राज्यपाल द्वारा करीब 11 माह पहले दिए गए निर्देश पर अमल के लिए अब तक कार्ययोजना नहीं बन सकी है। इसके लिए चार बार रिमाइंडर भी दिए जा चुके हैं। अब एक बार फिर इसके लिए इरीगेशन डिपार्टमेंट के अफसरों ने 9 मुख्य अभियंताओं को इस पर एक्शन के लिए निर्देशित किया है।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने पिछले साल 12 जून को एप्को की वार्षिक साधारण सभा के दौरान नदियों के प्रदूषण पर रोकथाम के लिए काम करने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि वेटलैंड और तालाबों के संरक्षण के लिए विशेष प्रयास किए जाने की जरूरत है ताकि नदियों को शुद्ध करने से पेयजल और वातवरण की शुद्धता बनी रहे। इसके बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जल गुणवत्ता के आधार पर एमपी की ऐसी नदियों को चिन्हित किया गया जो प्रदूषित हैं। उनके प्रदूषण वाले पाइंट भी तय किए गए और संबंधित विभागों को प्रदूषण रोकने के लिए काम करने को कहा गया लेकिन काम नहीं हुआ है।

पांच विभागों की जिम्मेदारी, यहां रोकना होगा प्रदूषण

नदियों के प्रदूषण रोकने के लिए जिन स्थानों पर काम करने के लिए विभागों की जिम्मेदारी तय की गई है। उसमें इंदौर में खान नदी पर निमोली टैंक से त्रिवेणी संगम तक, उज्जैन में क्षिप्रा नदी पर त्रिवेणी से सिद्धवट तक, नागदा में चंबल नदी पर नागदा से राजगढ़ तक प्रदूषण रोकने के लिए काम करना है। इसके अलावा बेतवा नदी को मंडीदीप से विदिशा तक तथा सोन नदी को भतुरा घाट पर सफाई के जरिये प्रदूषण मुक्त किया जाना है। इस काम के लिए जो विभाग जवाबदेह बनाए गए हैं उसमें नगरीय विकास और आवास, पंचायत और ग्रामीण विकास, जल संसाधन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन विभाग के नाम शामिल हैं।

इसलिए सक्रिय हुए विभाग

राज्यपाल द्वारा दिए गए निर्देश 12 जून 2023 के हैं और अब दो माह बाद फिर एप्को की वार्षिक साधारण सभा में बैठक होने वाली है। इसलिए अब 11 माह बीतने पर अधिकारियों को राज्यपाल के निर्देश पर अमल नहीं होने की चिंता सता रही है। दूसरी ओर लापरवाही का आलम यह भी है कि 10 जुलाई 2023, 26 जुलाई 2023, 18 जनवरी 2024, 22 अप्रेल 2024 को पत्र लिखे जा चुके हैं पर काम नहीं हुआ है। जल संसाधन विभाग ने अब इस मामले में सभी 9 मुख्य अभियंताओं को इसके लिए पत्र लिखकर नदियों के शुद्धिकरण के लिए काम करने को कहा है।


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