देवबंद स्थित दारुल उलूम की ओर से अंग्रेजी और अन्य आधुनिक विषयों की कोचिंग पर पाबंदी लगाने के फैसले पर एनसीपीसीआर की आपत्ति सामने आई है। आयोग ने डीएम सहारनपुर के माध्यम से संस्था से जवाब-तलब किया है। इससे पहले अल्पसंख्यक आयोग ने भी दारुल उलूम से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है। दरअसल, तीन दिन पहले दारुल उलूम ने संस्था के छात्रों को आदेश जारी किया था। इसमें कहा गया है कि संस्था में पढ़ाई करने के दौरान छात्र अंग्रेजी या अन्य आधुनिक विषयों की पढ़ाई बाहर जाकर नहीं कर सकेंगे। अगर कोई ऐसा करता पाया जाता है तो संबंधित छात्र को संस्थान से निष्कासित कर दिया जाएगा।
दारुल उलूम के इस आदेश से उन छात्रों में मायूसी छा गई है, जो प्राइवेट अंग्रेजी या आधुनिक शिक्षा से संबंधित विषयों की कोचिंग ले रहे थे। अब एनसीपीसीआर ने इस मामले में संज्ञान लिया है। वहीं, अंग्रेजी और अन्य आधुनिक विषयों को बैन करने के मामले में दारुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती अब्दुल कासिम नोमानी ने कहा कि संस्नथा अंग्रेजी या किसी अन्य भाषा के विरोध नहीं करती है। संस्था में बकायदा अंग्रेजी और कंप्यूटर आदि का अलग से विभाग है। प्रबंधन ने संस्था के हॉस्टल में रहने वाले छात्रों पर बाहर से अंग्रेजी में कोचिंग लेने पर या फिर किसी कारोबार से जुड़ने समेत अन्य बाहरी गतिविधियों पर पाबंदी लगाई है। इसका कारण यह है कि छात्र अपना पूरा समय उस पाठ्यक्रम को दें, जिसके लिए उन्होंने संस्थान में दाखिला लिया है।











